मंडला में शिक्षकों का ऐतिहासिक शक्ति प्रदर्शन
टीईटी के विरोध में सड़कों पर उतरे हजारों शिक्षक
- सरकार को दी तालाबंदी की चेतावनी
- सड़क से संसद तक संघर्ष का शंखनाद
- 25-30 वर्षों से सेवारत शिक्षकों ने ठुकराया परीक्षा का आदेश
- एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
मंडला महावीर न्यूज 29. अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के प्रांतीय आह्वान पर बुधवार को मंडला जिला मुख्यालय में शिक्षकों का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा। टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में जिले भर के लगभग 7000 शिक्षकों ने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर ऐतिहासिक रैली निकाली। आंदोलन का नेतृत्व जिला संयोजक संतोष सोनी और दिलीप मरावी ने किया, जिसमें महिला शिक्षिकाओं की भी बड़ी भागीदारी रही।

मान-सम्मान की लड़ाई
विशाल सभा को संबोधित करते हुए प्रांतीय संयोजक डीके सिंगौर ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की अधिसूचना और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षक टीईटी के दायरे में नहीं आते। इसके बावजूद शासन 25-30 वर्षों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ शिक्षकों को परीक्षा के लिए बाध्य कर रहा है, जो उनके मान-सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक सक्षम हैं, लेकिन वे इस अनुचित नियम का पुरजोर विरोध करेंगे।

भोपाल तक गूँजेगी आवाज
जिला संयोजक संतोष सोनी ने आगामी रणनीति साझा करते हुए बताया कि 8 अप्रैल के इस सफल प्रदर्शन के बाद 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर और 18 अप्रैल को राजधानी भोपाल में विशाल प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि टीईटी का आदेश निरस्त नहीं हुआ और प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना नहीं की गई, तो वे स्कूलों में तालाबंदी कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को विवश होंगे।

कलेक्ट्रेट से लालीपुर तक गूँजे नारे
शिक्षकों की यह रैली कलेक्ट्रेट कार्यालय से शुरू होकर लालीपुर चौराहा तक पहुँची, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। रैली के दौरान शिक्षकों की एकजुटता ने प्रशासन और विभाग को अपनी ताकत का अहसास कराया।










