तीन परिवार के 15 लोगों ने की सनातन धर्म में वापसी

आकाश, वायु, जल और पंचतत्व अटल सनातन हैं, जिसका कभी विनाश नहीं हो सकता

तीन परिवार के 15 लोगों ने की सनातन धर्म में वापसी

  • सुरंगदेवरी में ईसाई धर्म अपना चुके 3 परिवारों ने फिर अपनाया हिंदू धर्म
  • श्री सिद्धेश्वर धाम से मिली आश, अब पहचानी सनातन की शक्ति

मंडला महावीर न्यूज 29. जिले के सुरंगदेवरी क्षेत्र स्थित श्री सिद्धेश्वर धाम में जीव कल्याण सेवा संस्थान साईं दरबार के तत्वावधान में आयोजित श्री गणेश पुराण कथा के समापन पर ईसाई धर्म अपना चुके 3 परिवारों के 15 सदस्यों ने पुन: सनातन धर्म में वापसी की है। बताया गया कि जीव कल्याण सेवा संस्थान द्वारा धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में अपने 10 वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में श्री गणेश पुराण का संगीतमय आयोजन किया गया। साईं भक्त पंडित ललित नारायण मिश्रा के सानिध्य में आयोजित इस कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य आध्यात्मिक चेतना जागृत करना और सामाजिक एकता को बल देना था।जानकारी अनुसार हिंदू परिवारों के अन्य धर्म अपनाने की खबर लगातार सुर्खियों में बनी रहती है। मंडला जिले में भी ऐसे कई हिन्दु परिवार है जो हिन्दु धर्म छोड़कर अन्य धर्म अपना चुके है। ऐसा ही धर्म परिवर्तन का एक मामला जिला मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर सुरंगदेवरी में आया। बताया गया कि कारीकोन से लेकर साल्हेडंडा तक सैकड़ों परिवार हिन्दु धर्म छोड़कर अन्य धर्म अपना चुके है। वहीं इसी क्षेत्र के ग्राम सूरजपुरा के करीब 90 प्रतिशत लोग अपना धर्म परिवर्तन कर चुके है। कारण सिर्फ परिवारिक परेशानी के कारण अपने धर्म के प्रति आस्था में कमी है। अन्य धर्म में शामिल होकर उन्हें कुछ राहत मिलती है, लेकिन मनुष्य जीवन है, पग-पग में मनुष्य को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस परेशानी से मनुष्य तभी मुक्त हो सकता है, जब उसे अपने धर्म पर पूर्ण विश्वास हो।पंडित ललित नारायण मिश्रा ने बताया कि ग्राम सुरंगदेवरी क्षेत्र के तीन हिन्दु परिवार के 15 लोगों ने विगत वर्ष ईसाई धर्म अपना लिया था। जिसके बाद सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन समय के चक्र को कोई नहीं जानता, कब, कहां घूम जाए। ऐसा ही इन हिन्दु परिवार के साथ हुआ, जो ईसाई धर्म अपना चुके थे, उन परिवार के लोगों में फिर परेशानी आना शुरू हो गई। परिवार के सदस्य बीमार दुखी होने लगे। किसी परिवार के बड़े, बुजूर्ग की मौत हो गई, बीमारी का इलाज कराने के बाद भी इन्हें कहीं आराम नहीं मिल रहा था। ऐसे में इन्होंने श्री सिद्धेश्वर धाम सुरंगदेवरी के सांई भक्त पंडित ललित मिश्रा से मिले। जहां उन्होने उनकी परेशानी को समझा और उन्हें उनकी परेशानी से निजात दिलाने के लिए उपाए बताए। सांई भक्त श्री मिश्रा जी के बताए उपाए के बाद ईसाई धर्म अपना चुके ये 15 लोग अपने सनातन धर्म की शक्ति को पहचाने और उन्हें मानना पड़ा कि सनातन धर्म अपने आप में सभी धर्मो से श्रेष्ठ है।

परिवार के सदस्यों की मृत्यु और मन विचलित होने से किया धर्म परिवर्तन 

सुरंगदेवरी निवासी सुखरिया बाई ने बताया कि धर्म परिवर्तन करने से पहले उनके पति की मृत्यु हो गई फिर सांस, ससुर की भी मृत्यु हो गई थी। कुछ नहीं समझ आ रहा था कि परिवार में ऐसा कैसे हो रहा है। सुख शांति खत्म हो गई थी। इसी दौरान कुछ ईसाईयों से मुलाकात हुई और उन्होंने बताया कि ईसाई धर्म अपना लो। सारी परेशानी दूर हो जाएगी। जिसके बाद हम लोगों ने अपना धर्म परिवर्तन कर लिए। लेकिन कुछ दिनों तक सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन वहां भी आराम नहीं लगा। इसी दौरान श्री सिद्धेश्वर धाम सुरंगदेवरी के सांई भक्त पंडित ललित मिश्रा से मुलाकात हुई। उन्होंने कुछ उपाए बताए, जिसके बाद अब परिवार का माहौल अच्छा है, सुख, शांति है। जिसके बाद हम लोगों का मन अन्य धर्म के प्रति विचलित हो गया। हम जान गए कि सनातन धर्म ही श्रेष्ठ है।

तिलक वंदन, माला पहनाकर घर वापसी 

श्री सिद्धेश्वर धाम सुरंगदेवरी में आयोजित संगीतमय श्री गणेश पुराण के समापन पर सांई भक्त पंडित ललित नारायण मिश्रा ने ईसाई धर्म अपना चुके तीन हिन्दु परिवार के 15 लोगों की घर वापसी कराई। दोबारा हिन्दु धर्म में आने के बाद इनका पुराण के समापन पर तिलक वंदन कर फूल माला पहनाकर हिन्दु धर्म में वापिसी कराई। इस दौरान उपस्थित श्रृद्धालु इस दृश्य को देखकर खुशी जाहिर कर रहे थे। चारों तरफ भगवान श्री हरि के जायकारें गूंज उठे। हर्षोल्लास के साथ इनका स्वागत किया गया। पंडित ललित नारायण मिश्रा ने कहां कि सनातन धर्म विश्व के सभी धर्मों में सबसे पुराना धर्म है। परम्परगत वैदिक धर्म जिसमें परमात्मा को साकार और निराकार दोनों रूपों में पूजा जाता है। ये वेदों पर आधारित धर्म है, जो अपने अंदर कई अलग-अलग उपासना, पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय, और दर्शन समेटे हुए है।

सनातन धर्म में वापिसी का प्रयास 

पंडित ललित नारायण मिश्रा ने कहां कि महाराजपुर कारीकोन से साल्हेडंडा तक जितने भी लोगों ने हिन्दु धर्म को छोड़कर अन्य धर्म अपनाए है, उन सभी के मन में सनातन धर्म की अलख जगाई जाएगी। पूरा प्रयास किया जाएगा कि हिन्दु धर्म छोड़कर अन्य धर्म में शामिल हुए लोगों को अपने घर वापस बुलाया जाए और उन्हें सनातन धर्म की शक्ति की पहचान कराई जाए।

सनातन ही प्रकृति है 

पंडित ललित नारायण मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन ही प्रकृति है और सृष्टि ही सनातन है। आकाश, वायु, जल और पंचतत्व अटल सनातन हैं, जिनका कभी विनाश नहीं हो सकता। उन्होंने नर्मदा जल और विभूति की महिमा बताते हुए कहा कि अटूट श्रद्धा से कष्टों का निवारण होता है। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि क्षेत्र में धर्मांतरण की गतिविधियां बढ़ रही हैं और लोग भटक कर अन्य धर्म अपना रहे हैं।

बेटी की बीमारी से विचार में आया परिवर्तन 

पंडित ललित नारायण मिश्रा ने बताया कि विगत वर्ष भी एक धर्मांतरण मामले में बहुत से परिवारों की घर वापिसी हुई थी। जिस दौरान सुरंगदेवरी निवासी शिल्पा विश्वकर्मा ने बताया था कि धर्म परिवर्तन करने से पहले उनका बेटा पवन बार बार बेहोश हो जाता था, काफी ईलाज करा लेकिन ठीक नहीं हो पा रहा था। इसी दौरान कुछ ईसाईयों से मुलाकात हुई और उन्होंने इसका उपचार बताया कि आपका बेटा बिल्कुल ठीक हो जाएगा। आप लोग ईसाई धर्म अपना लो। सारी परेशानी दूर हो जाएगी। इससे हम लोगों ने अपना धर्म परिवर्तन कर लिए। लेकिन कुछ दिनों तक सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन वहीं परेशानी परिवार के सदस्यों के साथ होने लगी। कोई ना कोई बीमार हो जाता, उपचार कराने के बाद भी लाभ नहीं मिल पा रहा था। इसी दौरान उनकी 12 वर्षीय बेटी नेहा खून की उल्टी करने लगी। डॉक्टरों से उपचार कराया, नागपुर, जबलपुर समेत अन्य स्थानों पर दिखाया लेकिन आराम नहीं लगा। रिपोर्ट भी सब नार्मल थी, लेकिन खून की उल्टियां बंद नहीं हो रही थी। इसी दौरान श्री सिद्धेश्वर धाम सुरंगदेवरी के सांई भक्त ललित मिश्रा से मुलाकात हुई। उन्होंने कुछ उपाए बताए, जिसके बाद उनकी 12 वर्षीय बेटी बिल्कुल स्वस्थ्य हो गई। जिसके बाद हम लोगों का मन अन्य धर्म के प्रति विचलित हो गया। हम जान गए कि सनातन धर्म ही श्रेष्ठ है।

क्षेत्र में चर्चा का विषय 

संस्थान के प्रयासों से हुई इस घर वापसी की चर्चा पूरे जिले में हो रही है। साईं दरबार के सदस्यों का कहना है कि उनका उद्देश्य समाज को संगठित करना और लोगों को अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक करना है। समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।



 

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