मंडला में रेल विकास, दशकों की उपेक्षा पर कब टूटेगी चुप्पी

मंडला में रेल विकास, दशकों की उपेक्षा पर कब टूटेगी चुप्पी

  • केंद्रीय मंत्री के गृह जिले मंडला में रेल उपेक्षा, लंबी दूरी की सीधी ट्रेन का सपना आज भी अधूरा
  • दो बड़े राजनेताओं के बावजूद नहीं मिली नई रेल लाइन और कोचिंग डिपो
  • जनता ने मांगा समयबद्ध कार्ययोजना का जवाब

मंडला महावीर न्यूज 29. प्राकृतिक संपदा, आदिवासी संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत के लिए विख्यात मंडला जिला आज भी बुनियादी रेल सुविधाओं के मामले में सरकारी उपेक्षा का शिकार है। एक ओर देश में बुलेट ट्रेन, वंदे भारत और अमृत भारत स्टेशन जैसी महात्वाकांक्षी योजनाओं की चर्चा है, वहीं मंडला की जनता को दिल्ली, मुंबई, भोपाल या इंदौर के लिए एक भी स्थायी लंबी दूरी की सीधी रेल सेवा नसीब नहीं है। स्थिति तब और अधिक विचारणीय हो जाती है जब यह तथ्य सामने आता है कि मंडला का प्रतिनिधित्व पिछले लगभग 40 वर्षों से सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते कर रहे हैं, जो वर्तमान में मंडला सांसद हैं। मंडला की जनता का सीधा सवाल है कि इतने लंबे राजनीतिक अनुभव और केंद्रीय सत्ता में भागीदारी के बावजूद मंडला को रेल विकास में क्या मिला?आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में स्थायी लंबी दूरी की ट्रेनों का अभाव है। जिलेवासियों का कहना है कि जिले से कोई भी सीधी ट्रेन प्रमुख शहर दिल्ली, मुंबई, इंदौर, भोपाल के लिए शुरू नहीं हुई है। इसके साथ ही जिले में न कोई कोचिंग डिपो है और न ही पिछले कई दशकों में किसी नई रेल लाइन परियोजना को ठोस स्वीकृति मिली है। मंडला जिले की इस उपेक्षा के कारण जनता में यह भावना गहरी हो गई है कि मंडला को केवल चुनाव के समय ही याद किया जाता है।

मंडलावासियों का नेता और सरकार से सवाल 

स्थानीय सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने अब इस उपेक्षा पर मुखर होकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उनका स्पष्ट मत है कि रेलवे पूर्णत: केंद्र सरकार का विषय है, और ऐसे में मंडला जिले से दो-दो नेताओं का केन्द्र सरकार से जुड़ाव होने के बावजूद आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला को कोई भी रेल कनेक्टिविटी के लिए ठोस परियोजनाएं ना दिला पाना एक प्रश्र चिन्ह बन गया है। जिले के नेता केन्द्रीय मंत्री रहते हुए भी मंडला को महानगर के नजदीक तक नहीं पहुंचा पाया है। जिसके कारण जिलेवासियों में नाराजगी बनी हुई है।

जनता की प्रमुख मांगें

जागरुक नागरिकों का कहना है कि जबलपुर, मंडला, बिलासपुर पेंड्रा रोड, डिंडोरी नई रेल लाइन परियोजना को तुरंत प्राथमिकता दी जाए। मंडला, नरसिंहपुर रेल लाइन परियोजना को स्वीकृति दी जाए। इसके साथ ही मंडला स्टेशन को जल्द से जल्द महानगरों के साथ जोड़ा जाए, जिससे जिले के विकास को गति मिल सके और बेरोजगारी, उच्च शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ जिलेवासियों को मिल सके। इसके साथ ही मंडला से कम से कम दो स्थायी लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनें शुरू की जाएं।

इनका कहना है

40 वर्षों के राजनैतिक प्रभुत्व के बावजूद मंडला जिले में बुनियादी सुविधा सड़क, रेल कनेक्टिविटी और रोजगार की भारी कमी है। स्थानीय निवासियों में गहरा असंतोष है। वर्तमान कैबिनेट मंत्री जो पहले सांसद भी रह चुकी हैं वह इन गंभीर मुद्दों, विशेषकर रेल लाइन के लिए, केंद्र या राज्य के कथित दबाव के कारण चुप्पी साधे हुए हैं।


अखिलेश सोनी, रेल्वे संघर्ष समिति

मंडला की जनता अब चुप नहीं रहने वाली। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें अब केवल कोरे आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस क्रियान्वयन और जवाबदेही चाहिए। सवाल यह है कि क्या आने वाली पीढिय़ाँ भी यही सवाल पूछेंगी कि मंडला में रेल विकास कब होगा, या अब वास्तव में दशकों पुरानी इस उपेक्षा का कोई जवाब मिलेगा।


नितिन सोलंकी

मंडला जिले के विकास के लिए मंडला फोर्ट पर तत्काल कोचिंग डिपो और पीठ लाइन का निर्माण ज़रूरी है। साथ ही जिले से लंबी दूरी की ट्रेनें शुरू की जानी चाहिए। हमारी प्रमुख माँग है कि बिलासपुर से जबलपुर और गौरेला-पेंड्रा से मंडला-घंसौर तक नई रेल सेवाएँ चलाई जाएँ, ताकि कनेक्टिविटी बेहतर हो सके।


अभिजीत सोनवानी

रेल विकास ही मंडला के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य के नए द्वार खोल सकता है। यह केवल एक लाइन नहीं, बल्कि विकास की जीवन रेखा है। राज्य सरकार में मंत्री होने के नाते कैबिनेट मंत्री संपतिया उइके से अपेक्षाएं हैं, लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से ठोस पहल और फंडिंग के बिना यह सपना पूरा नहीं हो सकता।


ऐश्वर्य सराफ



 

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