रेल दोहरीकरण: 42 किमी मंडला फोर्ट-नैनपुर ट्रैक की अनदेखी पर उठे सवाल

गोंदिया-जबलपुर रेल दोहरीकरण: 42 किमी मंडला फोर्ट-नैनपुर ट्रैक की अनदेखी पर उठे सवाल

विकास से महरूम हो रहा आदिवासी बहुल जिला

  • नैनपुर के साथ न्याय तो मंडला से दुश्मनी क्यों
  • दोहरीकरण परियोजना से मंडला को बाहर रखने पर रोष
  • सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते से हस्तक्षेप की मांग

मंडला महावीर न्यूज 29. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के नागपुर मंडल के अंतर्गत आने वाली अति-महत्वपूर्ण गोंदिया-जबलपुर दोहरीकरण (डबलिंग) परियोजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। लेकिन इस हजारों करोड़ की परियोजना में आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले की उपेक्षा ने स्थानीय नागरिकों और रेल प्रेमियों के बीच नाराजगी पैदा कर दी है। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए गोंदिया-जबलपुर परियोजना के साथ ही मंडला फोर्ट से नैनपुर (42 किमी) के रेलखंड का दोहरीकरण भी अनिवार्य रूप से किया जाए।

भविष्य में बनेगा बड़ा अवरोध (बॉटलनैक)

उल्लेखनीय है कि मार्च 2026 में ₹5,235.79 करोड़ की भारी-भरकम लागत से 231 किलोमीटर लंबी गोंदिया-जबलपुर दोहरीकरण परियोजना को स्वीकृति मिली थी। यह मार्ग वाराणसी और प्रयागराज से दक्षिण भारत (चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद) को जोड़ने वाला सबसे छोटा रेल मार्ग है। रेल जानकारों और नागरिकों का तर्क है कि यदि मुख्य मार्ग के साथ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मंडला फोर्ट-नैनपुर ट्रैक का दोहरीकरण नहीं किया गया, तो भविष्य में ट्रेनों के सुचारू संचालन में भारी बाधा (बॉटलनैक) उत्पन्न होगी। इस मुख्य विकास परियोजना से वंचित रहने पर मंडला के विकास की गति अधूरी रह जाएगी।

गोटेगांव-मंडला-पेंड्रा नई रेल लाइन की भी मांग

दोहरीकरण के साथ-साथ, क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित गोटेगांव-घंसौर-मंडला-पेंड्रा नई रेल लाइन के निर्माण की मांग ने भी अब जोर पकड़ लिया है। इस नई लाइन के बन जाने से जबलपुर, घंसौर, मंडला, नैनपुर, बालाघाट और गोंदिया होते हुए मंडला सीधे उत्तर और दक्षिण भारत के मुख्य रेल नेटवर्क से मजबूती से जुड़ जाएगा। नागरिकों का कहना है कि रेलवे प्रशासन को क्षेत्र की इन रणनीतिक परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए 42 किमी के अतिरिक्त दोहरीकरण को वर्तमान योजना में ही समाहित कर लेना चाहिए, ताकि भविष्य की समस्याओं का स्थायी समाधान हो सके।

सांसद से जनता का सवाल- मंडला से उदासीनता क्यों?

इस उपेक्षा को लेकर क्षेत्रीय जनता और रेल कार्यकर्ताओं ने मंडला के सांसद व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते से इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने की पुरजोर अपील की है। जनता का सीधा सवाल है कि, “यदि नैनपुर और अन्य क्षेत्रों को रेल विकास का पूरा लाभ मिल रहा है, तो फिर मंडला जिले के साथ यह उदासीनता क्यों?” नागरिकों ने सांसद महोदय से आग्रह किया है कि वे रेलवे बोर्ड और रेल मंत्रालय के समक्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएं और मंडला फोर्ट-नैनपुर दोहरीकरण को इसी परियोजना में शामिल कराएं, ताकि आदिवासी अंचल के नागरिकों, पर्यटकों और व्यापारियों को इस ऐतिहासिक रेल परियोजना का वास्तविक लाभ मिल सके।


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