- कान्हा के चीतल प्रदेश के अन्य पार्को में कर रहे चहल कदमी
- सात माह में कान्हा के 2063 चीतल हुए ट्रांसलोकेशन
- नौरादेही अभ्यारण्य, गांधी सागर अभ्यारण्य और कूनो उद्यान श्योपुर में चीतल हुए शिफ्ट
- कान्हा टाईगर रिजर्व में वर्ष 2023 की गणना अनुसार 29 हजार 455 चीतल
मंडला महावीर न्यूज 29. विश्व की सबसे बड़ी जैव विविधता की प्रयोगशाला राष्ट्रीय उद्यान कान्हा नेशनल पार्क है। जहां हर प्रकार के जीव जंतु, वनस्पति वनों से आच्छादित है। दुर्लभ प्रजाति के जीव जंतु एवं वन्य प्राणी की उपलब्धता है। राष्ट्रीय उद्यान कान्हा के नाम से मंडला जिले को पूरी दुनिया में जाना जाता है। कान्हा नेशनल पार्क भारत के मध्यप्रदेश में मंडला और बालाघाट जिले की सीमा में स्थित है। कान्हा नेशनल पार्क मध्य भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। इस पार्क में रॉयल बंगाल टाइगर तेंदुए, भालू, बारहसिंघा, चीतल और जंगली कुत्ते की महत्वपूर्ण आबादी है। वैसे तो कान्हा की पहचान विश्व स्तर पर है। वहीं कान्हा में की जाने वाली सामान्य वन्य प्राणी गणना के अंतगर्त कान्हा टाईगर रिजर्व में वर्ष 2023 की गणना अनुसार 29 हजार 455 चीतल है।
कान्हा नेशनल पार्क के चीतलों को कान्हा पार्क के अन्य जोन और प्रदेश के अन्य नेशनल पार्को में आबाद करने के उद्देश्य से इन्हें ट्रांसलोकेशन करने की कार्य योजना बनाई गई है। योजना के तहत कान्हा टाइगर रिजर्व से आंतरिक और बाहरी ट्रांसलोकेशन विगत वर्ष 2016 से शुरू किया गया है। जिससे कान्हा के चीतलों का कुनबा में और वृद्धि हो सके। कान्हा नेशनल पार्क से अब तक आंतरिक और बाहरी ट्रांसलोकेशन में 2063 चीतलों को शिफ्ट किया गया है। चीतलों का स्थानातंरण प्रदेश के नौरादेही अभ्यारण्य सागर, गांधी सागर अभ्यारण्य मंदसौर और कूनो राष्ट्रीय उद्यान श्योपुर में शिफ्ट करने की योजना है। बताया गया कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान श्योपुर के लिए एक हजार चीतलों को ट्रांसलोकेशन करने की योजना है। जिसमें अब तक 122 चीतलों को भेजा जा चुका है। वहीं आंतरिक ट्रांसलोकेशन में कान्हा के हालोन घाटी में 1269 चीतल और कान्हा के फेन अभ्यारण्य में 421 चीतलों को शिफ्ट किया गया है।
चीतलों को कान्हा पार्क से प्रदेश के अन्य नेशनल पार्को में शिफ्ट करने के प्रथम चरण में वर्ष 2023 में शुरूआत की। जिसमें नौरादेही अभ्यारण्य सागर से चीतलों को ट्रांसलोकेशन की शुरूआत की गई। पहला ट्रांसलोकेशन में नौरादेही में 47 चीतलों को शिफ्ट किया गया था। जिसके बाद वर्ष 2024 में नौरादेही अभ्यारण्य सागर, गांधी सागर अभ्यारण्य मंदसौर और कूनो राष्ट्रीय उद्यान श्योपुर में भी अलग-अलग शिफ्ट में चीतलों को कान्हा पार्क से भेजा गया। बताया गया कि वर्ष 2023 से आज दिनांक तक कान्हा नेशनल पार्क से कुल 2063 चीतल तीन नेशनल पार्को में शिफ्ट किया जा चुका है। इसके साथ शासन के निर्देश के बाद फिर चीतलों को अन्य नेशनल पार्को में शिफ्ट किया जाएगा।
ट्रांसलोकेशन से जैव विविधता का होता है संतुलन
देशी, विदेशी पर्यटक कान्हा नेशनल पार्क में सफारी के साथ टाइगर्स समेत अन्य वन्य प्राणियों के दीदार के लिए पहुंचते है। कान्हा पार्क बाघो की धरती के नाम से जाना जाता है। कान्हा के सभी जोन में बाघों के दीदार हो ही जाते है। जानकार बताते है कि जिन क्षेत्रों में चीतल, हिरणों की संख्या ज्यादा होती है, वहां टाइगर इनके शिकार के लिए अपना क्षेत्र बना लेते है। वहीं एक ही क्षेत्र में बाघों की भी संख्या अधिक होने से बाघों के बीच में आपसी संघर्ष की भी स्थिति निर्मित होती है। इसी के चलते कान्हा पार्क के अन्य क्षेत्रों में भी चीतलों का आंतरिक ट्रांसलोकेशन किया गया है। जिससे बाघों का आवास क्षेत्र बढ़ सके और जैव विविधता संतुलन बने रहने के साथ बाघों के बीच आपसी संघर्ष भी कम होगा।
शिफ्टिंग के लिए पहले से करते है तैयारी
कान्हा के चीतलों को प्रदेश के अन्य पार्को में शिफ्ट करने के दौरान कान्हा के संबंधित अधिकारियों मौजूदगी रहती है। इनकी मौजूदगी में ही चीतलों को कैप्चर करने के साथ इन्हें अन्य पार्को में भी रिलीज किया जाता है। चीतलों को कैप्चर करने के लिए बोमा तकनीक का उपयोग किया जाता है। इन्हें बोमा के अंदर ले जाने का कोई प्रयास नहीं किया जाता। वन्य प्राणियों के इस तरह के ऑपरेशन के लिए लंबे समय से तैयारी की जाती है। जंगल के ऐसे क्षेत्र में पहले से बोमा तैयार कर लिया जाता है, जहां शाकाहारी वन्य प्राणियों का समूह मिलता है। ये वन्यप्राणी स्वयं घास चरते हुए बनाए गए बोमा के अंदर पहुंच जाते हैं। शिफ्टिग योग्य संख्या में वन्यप्राणियों के बोमा के अंदर पहुंचते ही उसके दोनो मुहानों को बंद कर दिया जाता है। शिफ्टिंग के दौरान सकरे वाले मुहाने पर वाहन लगाकर वन्य प्राणियों को हांका जाता है जिससे वे वाहन में चढ़ जाते हैं।
ऐसे किया गया चीतलों को बोमा से कैप्चर
चीतल, हिरण और बारहसिंघा बेहद नाजुक वन्य प्राणी होते हैं। जिन्हें पकडऩा या टेंक्यूलाइज करना खतरे से खाली नहीं होता। जिसके कारण चीतल को बिना हाथ लगाए और बेहोश किए बगैर कैप्चर करने का प्रयास किया जाता है। चीतलों को कैप्चर करने के लिए बोमा तकनीक का उपयोग किया जाता है। इन्हें बोमा के अंदर ले जाने का कोई प्रयास नहीं किया जाता। इसके लिए वाई के आकार का एक अपारदर्शी बाड़ा तैयार किया जाता है, जिसका एक हिस्सा काफी चौड़ा और सामने से खुला होता है, वहीं दूसरा हिस्सा पतली गली सा होता है। पतली गली वाले हिस्से के मुहाने पर उस विशेष वाहन को लगा दिया जाता है जिसमें चीतलों को परिवहन किए जाने हैं। बाड़े के चौड़े वाले खुले हिस्से से चीतल अंदर प्रवेश कर जाते हैं और फिर उन्हें हांककर पतली गली वाले हिस्से की तरफ ले जाया जाता है, जिसके मुहाने पर खड़े वाहन में चीतल सवार हो जाते हैं।
नौरादेही में अब तक पहुंचे 130 चीतल
मंडला के कान्हा टाइगर रिजर्व से चीतलों का स्थानातंरण प्रदेश के नौरादेही अभ्यारण्य सागर, गांधी सागर अभ्यारण्य मंदसौर और कूनो राष्ट्रीय उद्यान श्योपुर में किया जाना है। जिसकी शुरूआत नौरादेही अभ्यारण्य से की गई थी। नौरादेही में अब तक 130 चीतलों को शिफ्ट किया जा चुका है। इन चीतलों को बोमा तकनीक के माध्यम से विशेष वाहन में नौरादेही पार्क भेजा गया। जिन क्षेत्रों में चीतल या शाकाहारी जानवरों की संख्या ज्यादा है और जहां इनकी संख्या कम है, वहां उनकी संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से पार्क के अंदर और अन्य पार्कों में चीतलों को स्थानांतरित किया जाता है। इसी उद्देश्य से कान्हा में विगत वर्ष से अन्य पार्को में यहां के चीतलों को भेजा गया है। बताया गया कि कान्हा टायगर रिजर्व के किसली परिक्षेत्र से 15 अक्टूबर 2023 को 13 नर, 19 मादा चीतल, कान्हा टायगर रिजर्व के मुक्की परिक्षेत्र से 10 दिसंबर 2023 को 03 नर, 12 मादा चीतल और कान्हा मुक्की परिक्षेत्र से 02 जनवरी 2024 को 08 नर, 19 मादा चीतल और 29 फरवरी 2024 को 22 नर चीतल भेजे गए। इसके बाद 34 और चीतलों को नौरादेही भेजा जा चुका है। कुल 130 चीतल नौरादेही अभ्यारण्य ट्रांसलोकेशन किये जा चुके है।
कान्हा नेशनल पार्क के चीतलों को प्रदेश के अन्य नेशनल पार्को में आबाद करने के उद्देश्य से इन्हें शिफ्ट करने की योजना है। इसके अंतर्गत कान्हा टाइगर रिजर्व के चीतल अब कूनो राष्ट्रीय उद्यान श्योपुर में भी चहल कदमी करेंगे। कूनो में दक्षिण अफ्रीका से लाये गए चीती की मौजूदगी के बीच कान्हा के चीतलों से कूनो उद्यान में पर्यटकों को आकृषित करेगा। जिसके लिए कान्हा पार्क से 1000 चीतल ट्रांसलोकेशन की योजना बनाई गई है। योजना के अंतर्गत अब तक 122 चीतल कूनो उद्यान भेजे जा चुके है।



















