सात किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं छात्राएं, अधीक्षिका को हटाने की मांग

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सात किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं छात्राएं, अधीक्षिका को हटाने की मांग

मंडला में शासकीय कन्या शिक्षा परिसर चाटूआमार की छात्राओं का फूटा गुस्सा

  • मानसिक प्रताडऩा और जातिगत अपमान का लगाया आरोप
  • गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन ने भी ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच और अन्य जिले में स्थानांतरण की मांग की

मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले के शासकीय कन्या शिक्षा परिसर चाटूआमार में पदस्थ शिक्षिका एवं छात्रावास अधीक्षिका सिंधिया चौकसे के कार्यप्रणाली के खिलाफ छात्राओं का भारी आक्रोश सामने आया है। सैकड़ों की संख्या में छात्राएं और उनके अभिभावक अपनी शिकायत लेकर करीब 7 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। छात्राओं ने अधीक्षिका पर मानसिक प्रताडऩा, जातिगत अपमान और अभद्र व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें संस्था से तत्काल हटाने की मांग की है। इस पूरे मामले में गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन ने भी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच और शिक्षिका का अन्य जिले में स्थानांतरण करने की मांग की है।प्रदर्शन कर रही छात्राओं का आरोप है कि अधीक्षिका उनके साथ उचित व्यवहार नहीं करतीं और उन्हें लंबे समय से मानसिक रूप से प्रताडि़त किया जा रहा है। कुछ छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि अधीक्षिका द्वारा उनकी जाति को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां की जाती हैं और परिसर में अनुचित गतिविधियां की जाती हैं। छात्राओं ने दोटूक में कहा कि वे अब इस अधीक्षिका को परिसर में बिल्कुल नहीं देखना चाहतीं। उनका यह भी कहना है कि पूर्व में की गई शिकायतों और विरोध प्रदर्शन के बाद इस शिक्षिका का निलंबन हुआ था, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें पुन: उसी संस्था में पदस्थ कर दिया गया।

बिना कार्यभार ग्रहण किए छात्रावास में प्रवेश का आरोप 

गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन के प्रदेश महासचिव राजेंद्र परते के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में विगत 31 अक्टूबर की घटना का विशेष उल्लेख किया गया है। संगठन का आरोप है कि शिक्षिका ने विधिवत ज्वाइनिंग और अधिकृत कार्यभार ग्रहण किए बिना ही छात्रावास क्रमांक-2 में प्रवेश कर लिया और छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार किया। जीएसयू ने इसे छात्राओं की निजता और सुरक्षा से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर मामला बताया है।

10 बिंदुओं पर जांच और अन्य जिले में स्थानांतरण की मांग 

ज्ञापन के माध्यम से बताया गया कि शिक्षिका की मूल पदस्थापना कन्या आश्रम शाला जल्दा, जिला बालाघाट में है। हिंदी विषय के अध्यापन के लिए चयनित होने के बावजूद वे अधीक्षिका का अतिरिक्त प्रभार संभालती आ रही हैं। संगठन ने वर्ष 2017 में आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग की ओर से अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रावासों में उसी वर्ग की अधीक्षिका की पदस्थापना के संबंध में जारी निर्देशों के पालन की भी जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा पूर्व शिकायतों, चयन प्रक्रिया, ऑनलाइन परीक्षा, कार्यभार ग्रहण, प्रभार और कार्यकाल के दौरान हुए लेन-देन की उच्च स्तरीय जांच सहित कुल 10 बिंदुओं पर ठोस कार्रवाई की मांग उठाई गई है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक शिक्षिका को छात्रावास क्रमांक-2 और छात्राओं से जुड़े सभी प्रत्यक्ष प्रशासनिक कार्यों से अलग रखने और छात्राओं के हित में उनका अन्य जिले में स्थानांतरण करने की पुरजोर मांग की गई है।

जांच के बाद होगी कार्रवाई 

कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे ने बताया कि छात्राओं और कुछ पालकों ने अधीक्षिका के व्यवहार को लेकर शिकायत आवेदन दिया है। मामले की विधिवत जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि प्रकरण से जुड़े कुछ न्यायालयीन मामले भी हैं, जिनकी जांच की जा रही है। कलेक्टर ने छात्राओं और पालकों को उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।


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