करोड़ों खर्च कर अमृत भारत तो बना स्टेशन पर ट्रेन के लिए तरसे यात्री

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15 महीने से मंडला फोर्ट में खाली खड़ा रहता है पेंचवेली एक्सप्रेस का रैक

सफर को तरस रही जनता

  • नागपुर मंडल की लालफीताशाही से आक्रोश
  • करोड़ों खर्च कर ‘अमृत भारत’ तो बना स्टेशन पर ट्रेन के लिए तरसे यात्री
  • त्योहारी सीजन में प्राइवेट बसों का महंगा सफर करने को मजबूर

मंडला महावीर न्यूज 29.  मंडला जैसे आदिवासी बहुल जिले के रेल यात्रियों की समस्याओं को लेकर रेलवे प्रशासन का रवैया बेहद निराशाजनक और उपेक्षापूर्ण बना हुआ है। मंडला फोर्ट रेलवे स्टेशन को ‘अमृत भारत स्टेशन’ योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च करके आधुनिक रूप तो दे दिया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यहां के यात्रियों को अब तक किसी भी बड़ी ट्रेन की सीधी कनेक्टिविटी नहीं मिल सकी है। इस अव्यवस्था और नागपुर मंडल की लालफीताशाही के चलते स्थानीय जनता में भारी आक्रोश पनप रहा है।

15 महीने से खाली खड़ा रहता है पेंचवेली एक्सप्रेस का रैक

सबसे बड़ी विडंबना पेंचवेली एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 19343/19344) को लेकर है। इंदौर से छिंदवाड़ा और सिवनी के रास्ते नैनपुर तक चलने वाली इस ट्रेन का खाली रैक पिछले 15 महीनों से प्रतिदिन मंडला फोर्ट स्टेशन लाया जा रहा है। यह रैक दिन भर स्टेशन पर खड़ा रहता है, लेकिन क्षेत्र की जनता को इसमें सफर करने की अनुमति नहीं है। आमजन का आरोप है कि यह ट्रेन मंडला फोर्ट में सिर्फ ‘विश्राम’ करने के लिए आती है, यात्रियों को सुविधा देने के लिए नहीं।

त्योहारी सीजन में प्राइवेट बसों की मनमानी के शिकार यात्री

सीधी ट्रेन कनेक्टिविटी न होने का सबसे बड़ा खामियाजा आम जनता और विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है। दीपावली और छठ जैसे पावन त्योहारों पर जब बाहर पढ़ने वाले बच्चे और नौकरीपेशा लोग अपने घर लौटते हैं, तो उन्हें मजबूर होकर भोपाल और इंदौर के लिए महंगी प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ता है। रेलवे की इस अनदेखी के कारण यात्री बस संचालकों के मनमाने किराए की भेंट चढ़ रहे हैं, जिससे उनका भारी पैसा और समय दोनों बर्बाद हो रहे हैं।

डीआरएम नागपुर के घिसे-पिटे और गोलमोल जवाब

रेलवे अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी पूरी तरह से सवालों के घेरे में है। 9 जून को जब सोशल मीडिया के माध्यम से यह मुद्दा उठाया गया था, तब दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) नागपुर के डीआरएम ने जवाब दिया था कि मांग को संबंधित विभाग के पास भेज दिया गया है। महीनों बीत जाने के बाद, 22 अक्टूबर को जब पुनः स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई, तो रेलवे की तरफ से फिर वही घिसा-पिटा और गोलमोल जवाब मिला कि ‘कंसर्न्ड डिपार्टमेंट’ को अवगत करा दिया गया है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार प्रस्ताव और पत्र भेजे जाने के बावजूद ग्राउंड जीरो पर स्थिति ज्यों की त्यों है। ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि आखिर आदिवासी जिले की जनता के साथ यह अन्याय कब तक होता रहेगा और क्या दीपावली से पहले मंडला को पेंचवेली एक्सप्रेस की सौगात मिल पाएगी?


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