एक साल बाद भी पूरी नहीं हुईं मांगें, अब आर-पार की लड़ाई

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31 अक्टूबर से भोपाल में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे प्रदेश के 38 हजार कोटवार

मंडला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

  • एक साल बाद भी पूरी नहीं हुईं मांगें, अब आर-पार की लड़ाई
  • सात सूत्रीय मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान

मंडला महावीर न्यूज 29. मध्य प्रदेश के 38 हजार कोटवारों ने अपनी लंबित मांगों का निराकरण न होने पर अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मप्र आजाद कोटवार कर्मचारी संघ के बैनर तले कोटवारों ने 28 अक्टूबर को मुख्यमंत्री के नाम मंडला कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 31 अक्टूबर से भोपाल के नीलम पार्क में प्रदेश भर के कोटवार अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। इस बड़े आंदोलन में मंडला जिले से भी सैकड़ों कोटवार भोपाल कूच करेंगे।

संघ के जिला प्रभारी कुंवरदास धार्वैया ने बताया कि कार्यवाहक एवं प्रदेश अध्यक्ष हरवीर सिंह यादव के नेतृत्व में यह ज्ञापन सौंपा गया है। इससे पूर्व 4 सितंबर 2025 को भोपाल के अटल पथ पर तिरंगा यात्रा निकालकर भी सरकार के समक्ष मांगें रखी गई थीं, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी समस्याओं का कोई समाधान नहीं हुआ। अपनी मांगों को लेकर कोटवारों ने 2 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक काली पट्टी बांधकर काम किया और 22 से 28 अक्टूबर तक काम बंद हड़ताल व धरना दिया, लेकिन शासन ने उनकी गुहार नहीं सुनी। मजबूर होकर अब संगठन ने अनिश्चितकालीन आंदोलन का रास्ता चुना है।

कोटवार संघ की प्रमुख 7 सूत्रीय मांगें 

सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके कोटवारों को स्थायी शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए। समान कार्य-समान वेतन के तहत उन्हें सहायक पटवारी, भृत्य, वाहन चालक, कम्प्यूटर ऑपरेटर आदि पदों पर पदोन्नत किया जाए। पीढिय़ों से मिली सेवा भूमि को खसरे से हटाकर शासकीय दर्ज करने के आदेशों का उल्लंघन हो रहा है। इस भूमि पर कोटवारों को मालिकाना हक देकर उनके खाते में नाम दर्ज किया जाए। कोटवार पंचायत 2023 में घोषित 500 रुपये की वार्षिक वृद्धि केवल भूमिहीन कोटवारों को मिली है, इसका लाभ भूमिधारी कोटवारों को भी एरियर सहित दिया जाए। भंडार क्रय नियम 2022 के तहत बांटी जा रही घटिया वर्दी का विरोध। मंडला जिले के करीब 700 कोटवार तीन साल से वर्दी से वंचित हैं। संघ की मांग है कि पूर्व की भांति नकद राशि सीधे खाते में दी जाए और घटिया वर्दी वितरण की उच्च स्तरीय एजेंसी से जांच कराई जाए। एक ग्राम में दो कोटवार एवं नगरीय क्षेत्र में पद समाप्ति का आदेश तत्काल रद्द कर कोटवार-विहीन गांवों में नई भर्तियां की जाएं। पद के परंपरागत होने के कारण परिवार के सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। मृत्यु पर मिलने वाली अनुग्रह राशि 1 लाख से बढ़ाकर 10 लाख व सेवानिवृत्ति राशि 1 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की जाए। कटनी जिले में अधिक भूमि का हवाला देकर 15 सालों से कोटवारों को मानदेय नहीं दिया जा रहा है, वहां कम से कम 1000 रुपये मानदेय निर्धारित किया जाए।


 

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