विश्व फार्मासिस्ट दिवस
स्वास्थ्य सेवा की खामोश रीढ़, दवा विक्रेता से लेकर स्वास्थ्य सलाहकार तक
- मंडला जिले में मरीजों का अटूट विश्वास जीत रहे फार्मासिस्ट
- विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर आदिवासी बाहुल्य मंडला के अनसुने नायकों को सलाम
- मंडला के गुमनाम नायक, जो दवा के साथ बांटते हैं उम्मीद और विश्वास
- मंडला के स्वास्थ्य प्रहरी फार्मासिस्ट, जो चुपचाप रच रहे हैं सेहत की कहानी
मंडला महावीर न्यूज 29. अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध आदिवासी संस्कृति के लिए पहचाना जाने वाला मंडला जिला स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में अक्सर कई चुनौतियों का सामना करता है। लेकिन इस भूमि पर एक ऐसा वर्ग भी है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत रीढ़ होने के बावजूद अक्सर चर्चाओं से दूर रहता है। यह वर्ग है फार्मासिस्टों का। विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर हम जिले के उन अनसुने नायकों के योगदान को सलाम करते हैं, जो दूरदराज के ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी अस्पतालों तक हर जगह आम जनमानस के स्वास्थ्य की रक्षा कर रहे हैं। विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर मंडला के सभी फार्मासिस्ट इस बात को साबित करते हैं कि एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज के निर्माण में उनकी खामोश, लेकिन बेहद प्रभावी भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
जानकारी अनुसार मंडला जैसे आदिवासी बाहुल्य जिले में जहां के लोग बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने के लिए अक्सर कड़ा संघर्ष करते हैं, जहां फार्मासिस्टों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। जिले के विभिन्न ग्रामीण और स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ फार्मासिस्ट हर सुबह मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी पर पहुंचते हैं। यहां वे मरीजों को सिर्फ दवाएं ही नहीं देते, बल्कि उन्हें बीमारियों से बचाव के तरीके भी विस्तार से समझाते हैं। इन स्वास्थ्य कर्मियों के लिए यह काम महज एक नौकरी नहीं, बल्कि एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी है। जब कोई मरीज इनके पास आता है, तो फार्मासिस्ट उसे पूरी तरह समझाते हैं कि दवा शरीर में कैसे काम करेगी और इलाज के दौरान किन-किन सावधानियों का विशेष ध्यान रखना है। उनका मानना है कि मरीजों द्वारा जताया गया यह विश्वास ही उनकी असल कमाई है।
मुख्य लक्ष्य शत प्रतिशत सुरक्षा सुनिश्चित करना
बताया गया कि शहरी क्षेत्रों और विशेषकर मंडला जिला अस्पताल की बात करें, तो यहां पदस्थ फार्मासिस्ट दिन-रात भारी मानसिक दबाव के बीच काम करते हैं। अस्पताल में रोजाना मरीजों की भारी भीड़ उमड़ती है, ऐसे में हर मरीज को सही समय पर, सही मात्रा में सटीक दवा उपलब्ध कराना एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। फार्मासिस्टों का कहना है कि उनके काम में एक छोटी सी चूक भी किसी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है। इसलिए उनका मुख्य लक्ष्य सिर्फ दवा वितरण नहीं, बल्कि मरीज की शत-प्रतिशत सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।
ईमानदारी से देते है सही सलाह
जिले के नारायणगंज क्षेत्र में मेडिकल शॉप का संचालन करने वाले अनुभवी फार्मासिस्ट दिनेश सोनी अपनी लंबी सेवा का अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि पहले इस आदिवासी जिले में स्वास्थ्य को लेकर जानकारी का काफी अभाव था, लेकिन आज लोग बहुत जागरूक हो चुके हैं। आज हमारा काम सिर्फ दवा बेचना नहीं रह गया है, बल्कि हम समाज में एक स्वास्थ्य सलाहकार की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जब कोई मरीज यह पूछने आता है कि डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा सही है या नहीं, तो हमें उसे पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ सही सलाह देनी होती है। यही वह विश्वास का पवित्र रिश्ता है, जो हमने वर्षों की मेहनत से मरीजों के साथ बनाया है।
इनका कहना है
मंडला के गांवों में मेरा काम सिर्फ दवा देना नहीं, बल्कि लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना भी है। जब वे ठीक होकर मुस्कुराते हैं, तो मेरी मेहनत सफल हो जाती है।

कमलेश सिंह, फार्मासिस्ट, नारायणगंज
फार्मेसी का सामाजिक योगदान जन स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने में दवाईयों की पहुंच से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार तक है। फार्मासिस्ट दवाओं के सही वितरण, रोगियों को परामर्श देने और बीमारियों के इलाज के लिए नई दवाओं के विकास में योगदान करना है।

शरद मेश्राम, फार्मासिस्ट, जिला चिकित्सालय मंडला
एक फार्मासिस्ट का काम बहुत जिम्मेदारी भरा होता है। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हर मरीज को सही दवा मिले, क्योंकि एक छोटी सी गलती भी भारी पड़ सकती है। हम मरीज की सुरक्षा की गारंटी हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फार्मेसी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। एआई भविष्य के फार्मासिस्टों के लिए एक बेहतरीन सहायक तकनीक है, जो दवाओं की जानकारी, उनके प्रभाव और दुष्प्रभावों को समझने में मदद करती है। विद्यार्थी इसकी मदद से किसी भी विषय को अपनी भाषा में आसानी से समझ सकते हैं। आने वाले समय में एआई फार्मासिस्ट का स्थान तो नहीं ले सकता, लेकिन दोनों मिलकर सुरक्षित और सटीक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

विवेक कुमार कछवाहा, शिक्षक, सरदार पटेल फार्मेसी कॉलेज











