बिलासपुर-मंडला-जबलपुर रेल लाइन की जगी उम्मीद
रेलवे ने प्रस्ताव को परिचालन विभाग को भेजा
- 372 किमी लंबे बहुप्रतीक्षित रेल कॉरिडोर के नए सर्वे की मांग तेज
- आदिवासी अंचलों में खुलेंगे विकास के नए द्वार
मंडला महावीर न्यूज 29. छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित ‘बिलासपुर-मुंगेली-पंडरिया-मंडला-जबलपुर नई रेल लाइन’ परियोजना की दिशा में एक अहम सकारात्मक पहल हुई है। करीब 372 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित रेल कॉरिडोर के संबंध में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR), बिलासपुर ने सकारात्मक रुख दिखाया है। रेलवे ने एक्टिविस्ट द्वारा उठाए गए मुद्दों को सराहनीय बताते हुए प्रस्ताव को विस्तृत चर्चा और आगामी कार्रवाई के लिए अपने ‘परिचालन विभाग’ (Operating Department) को भेज दिया है।
2003-04 में हुआ था प्रारंभिक सर्वे, अब नए आकलन की मांग
इस रेल मार्ग के लिए पहली बार वर्ष 2003-04 में प्रारंभिक सर्वेक्षण कराया गया था। उस समय आर्थिक दर प्रतिफल (ROR) नकारात्मक होने के कारण इसे रोक दिया गया था। अब 2016 के राजनांदगांव-जबलपुर सर्वेक्षण का हवाला देते हुए यह मांग उठ रही है कि बीते दो दशकों में क्षेत्र की आबादी, व्यापार, कृषि, खनिज और वन उत्पादों के परिवहन में बड़ा बदलाव आया है। इसलिए पंडरिया-मंडला-जबलपुर सेक्शन के लिए नए सिरे से ट्रैफिक सर्वे (Review/Updated Traffic Survey) कराया जाए, ताकि इसकी वास्तविक व्यवहार्यता सामने आ सके।
कवलपुर को जंक्शन बनाने का सुझाव
हाल ही में स्वीकृत हुई कटघोरा-तखतपुर-मुंगेली-कवर्धा-डोंगरगढ़ रेल लाइन से इस नई परियोजना की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। स्वतंत्र रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी ने बताया कि इस स्वीकृति के बाद कवलपुर से पंडरिया की दूरी महज 15 किमी रह जाती है। ऐसे में कवलपुर को जंक्शन बनाकर ‘कवलपुर-पंडरिया-बिछिया-मंडला-बीजाडांडी-ग्वारीघाट’ (लगभग 245 किमी) रेल कॉरिडोर का नया सर्वे कराया जाना चाहिए। इससे पुरानी मांग को वर्तमान रेल नेटवर्क से जोड़ा जा सकेगा।
रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए बनेगी ‘जीवनरेखा’
यह परियोजना केवल दो शहरों को जोड़ने वाली लाइन नहीं, बल्कि एक बड़े उपेक्षित भू-भाग के विकास का रास्ता है। मंडला के समाजसेवी अखिलेश सोनी ने इसे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए ‘जीवनरेखा’ बताते हुए कहा कि इससे रोजगार, पर्यटन और शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं (एम्स जैसे बड़े अस्पतालों) तक पहुंच आसान होगी। वहीं, समाजसेवी दिलीप ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि उपेक्षित क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए इस नवीन रेलमार्ग पर पूरी ताकत से प्रयास किए जाएं।
अब रेलवे बोर्ड पर टिकी हैं निगाहें
SECR बिलासपुर के आधिकारिक पत्र (दिनांक 19 अगस्त 2026) के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि परिचालन विभाग इसे किस रूप में आगे बढ़ाता है। हालांकि, रेलवे ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि नई रेल लाइन के सर्वेक्षण, स्वीकृति और वित्तीय निर्णयों से जुड़ी अंतिम प्रक्रिया नई दिल्ली स्थित रेलवे बोर्ड के स्तर पर ही तय होगी। यदि नया ट्रैफिक सर्वे मंजूर होता है, तो इस बहुप्रतीक्षित परियोजना के हकीकत में बदलने का रास्ता साफ हो सकता है।










