मवई के 16 हजार बच्चों का भविष्य अधर में

मवई के 16 हजार बच्चों का भविष्य अधर में

100 किमी दूर बैठे तंत्र के भरोसे वनांचल की बेहाल शिक्षा व्यवस्था

  • 50 शून्य और 121 एकल शिक्षकीय स्कूल
  • पूर्णकालिक BEO के अभाव में बाबुओं के भरोसे चल रहा मवई का शिक्षा विभाग

विशेष रिपोर्ट

मंडला महावीर न्यूज 29.  मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे मंडला जिले के आदिवासी बहुल वनांचल क्षेत्र मवई में शासकीय शिक्षा व्यवस्था की अत्यंत चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित इस दुर्गम क्षेत्र में 16 हजार से अधिक विद्यार्थियों का भविष्य शिक्षकों की भारी कमी और प्रशासनिक अनदेखी के कारण अधर में लटका हुआ है।

335 शालाएं और 16 हजार से अधिक विद्यार्थी

मवई विकासखंड में कुल 335 शासकीय शालाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें 255 प्राथमिक, 59 माध्यमिक, 14 हाई स्कूल और 7 हायर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। इन विद्यालयों में दर्ज 16,017 विद्यार्थियों (7,724 बालक और 8,293 बालिकाएं) के पठन-पाठन की ज़िम्मेदारी शिक्षा विभाग पर है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि इतने बड़े विकासखंड की निगरानी के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है।

पूर्णकालिक BEO का अभाव: बाबुओं के भरोसे कार्यालय

दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस क्षेत्र में वर्तमान में कोई पूर्णकालिक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) नियुक्त नहीं है। पूरा विभाग अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चलाया जा रहा है।

  • नियमित मॉनिटरिंग ठप: जिला मुख्यालय से 100 किमी की दूरी के कारण प्रभारी अधिकारी महीने में एकाध बार ही मवई कार्यालय पहुँच पाते हैं।
  • कागजी कार्रवाई तक सीमित: स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि पूर्णकालिक अधिकारी न होने से ब्लॉक शिक्षा कार्यालय का काम बाबुओं के भरोसे चल रहा है। केवल कागजों में आंकड़े और रिपोर्ट बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी जाती हैं, जबकि स्कूलों का जमीनी निरीक्षण पूरी तरह बंद है।

50 स्कूल बिना शिक्षक, 121 में महज एक शिक्षक

शिक्षकों की उपलब्धता के मामले में आंकड़े बेहद भयावह हैं:

  • शून्य शिक्षकीय शालाएं: विकासखंड की 34 प्राथमिक और 16 माध्यमिक यानी कुल 50 शालाएं शून्य शिक्षकीय हैं, जहाँ एक भी नियमित शिक्षक नहीं है।
  • एकल शिक्षकीय शालाएं: 100 प्राथमिक और 21 माध्यमिक यानी कुल 121 शालाएं एकल शिक्षकीय व्यवस्था में चल रही हैं।
  • व्याख्याताओं के पद रिक्त: उच्च माध्यमिक स्तर पर अध्यापन के लिए 16 व्याख्याताओं के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।

कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

मवई के अधिकांश दूरस्थ ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के बच्चों के लिए शासकीय स्कूल ही शिक्षा का एकमात्र जरिया हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मवई के अध्यक्ष संतोष रानू हरदहा ने कलेक्टर मंडला को ज्ञापन सौंपकर प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की है।

उन्होंने मांग रखी है कि:

  • मवई में तत्काल पूर्णकालिक BEO की नियुक्ति की जाए।
  • शून्य व एकल शिक्षकीय विद्यालयों में शिक्षकों की त्वरित व्यवस्था की जाए।
  • व्याख्याताओं के 16 रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए।
  • वनांचल के विद्यालयों के शैक्षणिक स्तर और शिक्षकों की उपस्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

भौगोलिक दूरी और वनांचल क्षेत्र होना बच्चों के मौलिक शिक्षा के अधिकार में बाधा नहीं बनना चाहिए। यदि समय रहते रिक्त पदों पर भर्तियां और पूर्णकालिक अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई, तो मवई के हजारों आदिवासी बच्चों का भविष्य कागजी आंकड़ों के खेल में उलझकर रह जाएगा।


(स्थानीय रिपोर्ट एवं ब्लॉक कांग्रेस कमेटी, मवई द्वारा सौंपी गई मांग पर आधारित)


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