सागर जहरीली शराब कांड
12 मौतों के बाद जागा प्रशासन
- बिना फोरेंसिक जांच क्लीनचिट देने पर उठे गंभीर सवाल
- शराब माफिया और व्यवस्था का गठजोड़
- बरगी विस्थापित संघ ने की सप्लाई चेन से लेकर राजनीतिक संरक्षण तक की उच्चस्तरीय जांच की मांग
सागर/मंडला महावीर न्यूज 29 । जिले की बंडा तहसील के छह गांवों (घूघरा खुर्द, नौराज, बमूरा, पाटन, चौका और दलपतपुर) में जहरीली और मिलावटी शराब पीने से हुई मौतों ने मध्य प्रदेश की आबकारी व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और राजनीतिक संरक्षण की पोल खोलकर रख दी है। इस त्रासदी में प्रशासन ने अब तक 12 मौतों की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय रिपोर्ट्स में मृतकों का आंकड़ा 19 तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। आंखों में धुंधलापन जैसी शिकायतों के साथ करीब 30 लोग अभी भी चिकित्सा निगरानी में हैं।
बिना फोरेंसिक जांच के दी गई थी क्लीनचिट
घटना से ठीक पहले एक स्थानीय अखबार ने नकली शराब की पैकेजिंग का खुलासा किया था, लेकिन आबकारी और पुलिस विभाग ने बिना किसी फोरेंसिक जांच के उसे क्लीनचिट दे दी थी। इसी लापरवाही के एक दिन बाद गांवों में मौतों का सिलसिला शुरू हो गया। प्रारंभिक जांच में शराब की खेप उत्तर प्रदेश के ललितपुर क्षेत्र से आने की बात सामने आई है। पुलिस ने अब तक 30 लोगों को आरोपी बनाकर 14 को गिरफ्तार किया है, 5 दुकानें सील की हैं और कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
लगातार हो रही मौतों के भयावह आंकड़े
बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राज कुमार सिन्हा ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में जहरीली शराब से मौतें कोई नई बात नहीं है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 से 2020 के बीच मात्र तीन वर्षों में प्रदेश में अवैध शराब से 814 मौतें दर्ज की गईं, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 108 था। जनवरी 2021 में मुरैना (24 मौतें) और जनवरी 2022 में भिंड (4 मौतें) की त्रासदियों के बाद भी शासन-प्रशासन ने रोकथाम का कोई ठोस तंत्र विकसित नहीं किया।
विस्तृत और स्वतंत्र जांच की मांग
सिन्हा ने कहा कि घटना के बाद निचले स्तर के कर्मचारियों का निलंबन या छोटे विक्रेताओं की गिरफ्तारी केवल एक दिखावा है। उन्होंने सरकार की विफलता पर सवाल उठाते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है:
- ललितपुर से लेकर सागर के गांवों तक शराब पहुंचने की पूरी ‘सप्लाई चेन’ का पर्दाफाश किया जाए।
- बीते महीनों में अवैध शराब को लेकर मिली शिकायतों और पुलिस-आबकारी विभाग की कार्यवाहियों का ऑडिट हो।
- स्थानीय शराब ठेकेदारों, एजेंटों और संदिग्ध आपूर्तिकर्ताओं के आर्थिक लेन-देन की सघन जांच की जाए।
- जिन पुलिस और आबकारी अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें बंद रखीं, उनकी स्वतंत्र जांच कर आपराधिक जिम्मेदारी तय हो।
- राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और संलिप्त पाए जाने पर बड़े रसूखदारों पर भी वैसी ही कठोर कार्रवाई हो जैसी छोटे तस्करों पर होती है।
राज कुमार सिन्हा
बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ








