शिक्षक दिवस पर भोपाल में अतिथि शिक्षकों का हल्लाबोल
बारिश-कीचड़ के बीच जलाया ज्ञापन
- 18 साल के शोषण और वादाखिलाफी से आक्रोश
- 2 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान
- मंडला के शिक्षक भी हुए शामिल
भोपाल/मंडला। शिक्षक दिवस के अवसर पर जहां एक ओर मध्य प्रदेश में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किए जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर भोपाल के शाहजहांनी पार्क में हजारों अतिथि शिक्षक तेज बारिश और कीचड़ के बीच अपनी मांगों को लेकर हल्लाबोल कर रहे थे। दिनभर चले इस आंदोलन में जब सरकार का कोई नुमाइंदा बात करने या ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा, तो आक्रोशित शिक्षकों ने अपना ज्ञापन अग्नि के हवाले कर दिया। साथ ही, 2 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू करने का संकल्प लिया। इस राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन में मंडला जिले के अतिथि शिक्षकों ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
मंडला के शिक्षकों ने याद दिलाया इतिहास, जताया अपमान का दर्द
आंदोलन में शामिल मंडला जिलाध्यक्ष पी.डी. खैरवार, हेमराज मसराम और रुमीना खान ने बताया कि शाहजहांनी पार्क वही ऐतिहासिक जगह है, जहां वर्षों पहले हुए महीनों लंबे आंदोलन के कारण कमलनाथ सरकार गिर गई थी। अतिथि शिक्षकों ने राज्य सरकार पर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि वे भी शिक्षकीय दायित्व निभाते हैं, लेकिन शिक्षक दिवस पर सम्मान की बजाय उन्हें घोर अपमान का सामना करना पड़ा।
“ऐसा कोई नेता सगा नहीं, जिसने अतिथि शिक्षकों को ठगा नहीं”
शिक्षकों का कहना है कि वर्ष 2007 में शुरू हुई यह व्यवस्था 18 साल बाद भी अंशकालिक है। सेवा से कभी भी हटा दिए जाने के डर और अस्थिरता के कारण अतिथि शिक्षकों का भारी मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है। उन्होंने राजनेताओं पर केवल जुमलेबाजी का आरोप लगाते हुए कहा:
- तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 2 सितंबर 2023 को भोपाल महापंचायत में नियमितीकरण का जो वादा किया था, वह झूठा साबित हुआ।
- कमलनाथ ने अपने संकल्प पत्र में वादे किए, लेकिन सत्ता में आने के बाद भूल गए।
- वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधायक रहते हुए समर्थन पत्र दिया था, जिसे वे अब मुख्यमंत्री बनकर भूल गए हैं।
- ज्योतिरादित्य सिंधिया न्याय दिलाने का वादा कर भाजपा में आए थे, लेकिन हालात आज भी जस के तस हैं। शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह का अवकाश का वादा भी कोरा साबित हुआ।
अब होगी आर-पार की लड़ाई
अतिथि शिक्षकों के समर्थन में सैकड़ों सांसदों और विधायकों के पत्र आज भी कचरे के डिब्बे में पड़े हैं। 18 सालों के इस शोषण और अवसाद के कारण सैकड़ों अतिथि शिक्षक आत्महत्या कर चुके हैं, लेकिन सरकार मौन है। समिति के संस्थापक पी.डी. खैरवार ने चेतावनी देते हुए कहा कि प्रदेश के अतिथि शिक्षक अब केवल ज्ञापन नहीं सौंपेंगे, बल्कि 2 अक्टूबर से आर-पार की लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं।









