कान्हा, मुक्की, सरही और किसली रेंज में दिखे तीन दुर्लभ गिद्ध

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ग्रीष्मकालीन गणना के पहले दिन 306 और दूसरे दिन मिले 333 गिद्ध

  • कान्हा, मुक्की, सरही और किसली रेंज में दिखीं तीन दुर्लभ प्रजातियां
  • कान्हा और फेन सेंचुरी में वैज्ञानिक पद्धति से हो रहा गणना कार्य

मंडला महावीर न्यूज 29. पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में नेचुरल क्लीनर की भूमिका निभाने वाले गिद्धों की बढ़ती संख्या कान्हा के समृद्ध वातावरण के लिए एक अच्छी खबर है। बताया गया कि मध्यप्रदेश शासन के वन विभाग द्वारा प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना-2026 के दूसरे चरण ग्रीष्मकालीन गणना का कार्य कान्हा टाइगर रिजर्व में शुरू हो गया है। गिद्धों की घटती संख्या पर चिंता और उनके संरक्षण के उद्देश्य से कान्हा के कोर एवं बफर वनमंडल के साथ फेन वाइल्डलाइफ सेंचुरी के सभी 13 परिक्षेत्रों में यह तीन दिवसीय विशेष अभियान चलाया जा रहा है। ग्रीष्मकालीन गणना के पहले दिन 306 और दूसरे दिन मिले 333 गिद्ध मिले है।बताया गया कि गिद्धों की सटीक जानकारी और उनके आवासों के आकलन के लिए वन विभाग ने पूरी तैयारी कर रखी है। गणना के लिए कान्हा के समस्त परिक्षेत्रों की 182 बीटों को शामिल किया गया है। पहले दिन सुबह 5.30 बजे से ही वन अमला पूरी सतर्कता के साथ अपनी ड्यूटी पर तैनात हो गया। इस बार की गणना पूरी तरह से वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित है, जिसमें मोबाइल एप्लीकेशन और डेटा शीट का उपयोग किया जा रहा है जिससे गिद्धों की वास्तविक संख्या का सटीक डेटा प्राप्त हो सके।

दो दिन 639 गिद्धों की हुई पहचान 

गिद्ध गणना के पहले दिन प्राप्त जानकारी के अनुसार कान्हा, किसली, मुक्की और सरही परिक्षेत्रों में भारतीय गिद्ध और सफेद पीठ वाले गिद्ध प्रजातियों के कुल 306 गिद्धों को चिन्हित किया गया है। यह तीन दिवसीय गणना कार्यक्रम आगामी 24 मई तक निरंतर जारी रहेगा। अधिकारियों का मानना है कि यह गणना न केवल गिद्धों की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट करेगी, बल्कि उनके संरक्षण की दिशा में भविष्य की रणनीतियां बनाने में भी मील का पत्थर साबित होगी। कान्हा प्रबंधन द्वारा आयोजित ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना के दूसरे दिन पार्क के विभिन्न परिक्षेत्रों में कुल 333 गिद्धों की उपस्थिति दर्ज की गई है।

तीन प्रमुख और दुर्लभ प्रजातियों की हुई पहचान 

पार्क प्रबंधन से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह गणना कान्हा टाइगर रिजर्व के चार प्रमुख परिक्षेत्र कान्हा, मुक्की, सरही और किसली में एक साथ की जा रही है। शनिवार को द्वितीय दिवस के सर्वेक्षण के दौरान मुख्य रूप से गिद्धों की 3 अत्यंत महत्वपूर्ण प्रजातियां कैमरे और दूरबीन में दर्ज की गईं। इनमें भारतीय गिद्ध, सफेद पीठ वाले गिद्ध और अत्यंत दुर्लभ माने जाने वाले राज गिद्ध शामिल हैं।

कुनबा बढऩे के संकेत, 28 अवयस्क शावक भी मिले

दूसरे दिन गणना दल द्वारा किए गए सूक्ष्म और वैज्ञानिक अवलोकन के दौरान कुल दर्ज 333 गिद्धों में से 305 वयस्क पाए गए हैं। वहीं सबसे राहत की बात यह रही कि इस दौरान 28 अवयस्क यानी गिद्धों के बच्चे भी स्वस्थ अवस्था में दर्ज किए गए हैं, जो क्षेत्र में उनके सफल प्रजनन और बढ़ते कुनबे की ओर सकारात्मक संकेत करते हैं।

वैज्ञानिक प्रोटोकॉल और प्रशिक्षित अमले से हो रही गणना

यह पूरी गणना वन्यजीव विशेषज्ञों द्वारा निर्धारित कड़े अंर्तराष्ट्रीय प्रोटोकॉल और गाइडलाइंस के अनुसार की जा रही है। इसके लिए कान्हा के विशेष रूप से प्रशिक्षित मैदानी अमले और वनकर्मियों को तैनात किया गया है। इस वैज्ञानिक गणना का मुख्य उद्देश्य पार्क क्षेत्र में गिद्धों की सटीक संख्या, उनकी प्रजातिगत स्थिति, उनके घोंसलों के पैटर्न और उनके दीर्घकालिक संरक्षण और संवर्धन संबंधी महत्वपूर्ण डेटा बेस तैयार करना है।

संरक्षण के लिए कान्हा प्रबंधन के सतत प्रयास 

कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा गिद्धों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा, उनके लिए भोजन की सुरक्षित उपलब्धता और बाहरी खतरों से बचाव के लिए निरंतर जमीनी प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की नियमित और ग्रीष्मकालीन गणनाओं से प्राप्त होने वाले आंकड़े भविष्य में गिद्धों के संरक्षण की नई कार्ययोजना और नीतियां बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।


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