भीषण गर्मी में तप रहे आंगनबाड़ी के नौनिहाल
स्कूलों में छुट्टी, पर नन्हे बच्चों के लिए राहत नहीं
- 11.30 बजे की चिलचिलाती धूप में घर जाने को मजबूर बच्चे
- पालकों ने की गर्मी की छुट्टी और सूखा राशन देने की मांग
- धूप में घर लौटने को मजबूर बच्चे और सहायिका
मंडला महावीर न्यूज 29. मई माह की भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जहाँ शासन के निर्देशानुसार जिले के प्राथमिक विद्यालयों से लेकर हायर सेकेंडरी स्कूलों तक में 1 मई से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिया गया है, वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले 3 से 6 वर्ष के नन्हे बच्चों को इस चिलचिलाती धूप में राहत नहीं मिली है।
पालकों ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र सुबह 7.30 बजे खुलते हैं और पोषण आहार वितरण के बाद 11.30 बजे बच्चों की छुट्टी होती है। मई माह में सुबह 11.30 बजे तक धूप काफी तेज हो जाती है, जिससे बच्चों के बीमार होने का खतरा बढ़ गया है। सहायिकाओं को इन नन्हे बच्चों को पैदल घर छोडऩे जाना पड़ता है। भीषण गर्मी को देखते हुए कई पालक अपने बच्चों को केंद्र भेजने में कतरा रहे हैं, वहीं बच्चे भी धूप के कारण केंद्र जाने से आनाकानी कर रहे हैं।
सूखा पोषण आहार देने की मांग
ग्रामीणों और पालकों ने प्रशासन से मांग की है कि जिस तरह स्कूलों में छुट्टियां दी गई हैं, उसी तर्ज पर आंगनबाड़ी केंद्रों में भी कम से कम दो माह का अवकाश दिया जाना चाहिए। पालकों का सुझाव है कि केंद्रों में पका हुआ भोजन देने के बजाय सूखा पोषण आहार बच्चों की माताओं को वितरित कर दिया जाए, जिससे बच्चे घर पर ही सुरक्षित रहकर तंदुरुस्त हो सकें। यदि छुट्टी संभव न हो, तो कम से कम छुट्टी का समय सुबह 9 बजे किया जाए।
कम मानदेय, अधिक काम का बोझ
कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने भी अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा कि वे कम मानदेय में भी शासन की हर योजना को धरातल पर उतारती हैं। गर्भवती माताओं के स्वास्थ्य से लेकर जन्म-मृत्यु सर्वे और हर घर की जानकारी रजिस्टर में दर्ज करने तक का कठिन कार्य वे करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन को उनके और बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और पालकों ने सामूहिक रूप से जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है। उनका कहना है कि कम वेतन में अधिक काम करने के बावजूद उनके स्वास्थ्य और छोटे बच्चों की सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है।










