अक्षय तृतीया पर दुर्लभ मालव्य और गजकेसरी योग का महासंयोग
खरीदारी और मांगलिक कार्यों के लिए अबूझ मुहूर्त-पंडित संदीप ज्योतिषी
- अक्षय तृतीया पर बरसेगी लक्ष्मी-कुबेर की कृपा
- ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप ने बताए सुख-समृद्धि के अचूक उपाय
- दान और जपतप से मिलेगा अक्षय फल
मंडला महावीर न्यूज 29. सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में कुछ तिथियाँ अपने आप में इतनी पवित्र और प्रभावशाली मानी जाती हैं कि वे मानव जीवन को सकारात्मकता और सत्कर्म का संदेश देती हैं। ऐसी ही एक अत्यंत पावन और सिद्ध तिथि है अक्षय तृतीया जिसे जनमानस में आखातीज या अक्ति के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष अक्षय तृतीया का पर्व धर्म, सेवा और सत्कर्म की अनंत परंपरा के प्रतीक के रूप में अत्यंत शुभ संयोगों के साथ मनाया जाएगा।
अबूझ मुहूर्त का महत्व
क्षेत्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप ने अक्षय तृतीया के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह तिथि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है। इस दिन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक अबूझ मुहूर्त (बिना किसी विशेष मुहूर्त के शुभ) दिन है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों ही अपनी उच्च राशियों में होते हैं, जिससे प्राकृतिक रूप से एक अत्यंत सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यही कारण है कि इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत, नए व्यापार का शुभारंभ और वाहन-सम्पत्ति की खरीदारी जैसे कोई भी मांगलिक कार्य बिना किसी पंचांग दोष के निर्विवाद रूप से किए जा सकते हैं।
पौराणिक मान्यताएँ और धार्मिक पक्ष
पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि अक्षय तृतीया को कालचक्र परिवर्तन का अत्यंत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी पवित्र तिथि को सतयुग का समापन और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। यह दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यता है कि पतित पावनी माँ गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण भी इसी तिथि को हुआ था, जिससे यह दिन गंगा स्नान के लिए भी अत्यंत पुण्यकारी है।
महाभारत काल से जुड़ी एक कथा के अनुसार वनवास के दौरान सूर्य देव ने पांडवों को अक्षय पात्र इसी दिन प्रदान किया था, जिससे उनके पास कभी अन्न की कमी नहीं हुई। वहीं भगवान श्रीकृष्ण ने अपने परम मित्र सुदामा की दरिद्रता भी इसी पावन तिथि पर दूर की थी, जो निस्वार्थ मित्रता और ईश्वर की कृपा का प्रतीक है। इसके अलावा, यह पर्व भगवान विष्णु के लक्ष्मी-नारायण स्वरूप, देवी लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर देव को विशेष रूप से समर्पित है।
पूजा विधि और मंत्र
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी या घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत या पूजा का संकल्प लें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को पीले पुष्प, चंदन, धूप-दीप अर्पित करें। इस दिन ऋतु फल जैसे खीरा, खरबूजा, आम और पारंपरिक रूप से सत्तू, चने की दाल का भोग विशेष रूप से लगाना चाहिए। पूजा के दौरान ? नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करना विशेष फलदायी और मनोकामना पूर्ण करने वाला माना गया है।
दान की महत्ता और पर्यावरण संरक्षण
अक्षय तृतीया का पर्व दान की महिमा को भी उजागर करता है। यह तिथि बसंत ऋतु के अंत और ग्रीष्म ऋतु के आगमन का संकेत देती है। पंडित संदीप ने बताया कि गर्मी से बचाव की वस्तुओं का दान इस दिन अत्यंत पुण्यकारी होता है। जल से भरे घड़े, छाता, चटाई, चावल, घी, नमक, खीरा, आम, खरबूजा, मिश्री और सत्तू का दान करने से दरिद्रता दूर होती है और व्यक्ति को अक्षय (कभी न खत्म होने वाले) फल की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही, पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पीपल, आम, बरगद, बेल और जामुन जैसे वृक्षों का रोपण करना भी इस दिन अत्यंत पुण्यकारी और दूरगामी फल देने वाला बताया गया है।
इस बार बन रहे हैं दुर्लभ योग, खरीदारी के लिए सर्वश्रेष्ठ
पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि इस वर्ष अक्षय तृतीया पर कई ऐसे दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, जो इसे खरीदारी और निवेश के लिए अत्यंत श्रेष्ठ बनाते हैं। मालव्य राजयोग के दिन शुक्र देव अपनी स्वराशि वृषभ में प्रवेश करेंगे, जिससे अत्यंत शुभ मालव्य राजयोग का निर्माण होगा। यह योग सुख-समृद्धि और वैभव देने वाला है। गजकेसरी योग मे चंद्रमा भी अपनी उच्च राशि वृषभ में रहेंगे, जहाँ उनकी युति गुरु देव से होने पर गजकेसरी योग बनेगा, जो मान-सम्मान, ज्ञान और सफलता का कारक है।
नक्षत्र और अन्य संयोग
इसके अलावा स्वाती और विशाखा नक्षत्र, ब्रह्म योग और इंद्र योग का दुर्लभ संयोग भी इस दिन रहेगा। इन अत्यंत शुभ योगों में भगवान लक्ष्मी-नारायण और कुबेर देव की पूजा के साथ स्वर्ण, आभूषण, नए बर्तन, भूमि-भवन और वाहन की खरीदारी करना अत्यंत मंगलकारी, स्थिर और सुखदायी माना गया है। ज्योतिषाचार्य ने सभी श्रद्धालुओं से इस पावन तिथि पर सत्कर्म, दान और ईश्वर की भक्ति कर अपने जीवन को सफल बनाने का आह्वान किया है।










