10 सूत्रीय मांग के साथ सीजफायर का एलान

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10 सूत्रीय प्रस्ताव: थम गई जंग, पर दुनिया पर आर्थिक संकट बरकरार

  • होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर बनी सहमति
  • 30 दिनों के युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को दिया 55 लाख करोड़ का जख्म
  • 10 सूत्रीय मांग के साथ सीजफायर का एलान

मंडला महावीर न्यूज 29. पश्चिम एशिया में पिछले एक महीने से जारी भीषण रक्तपात पर आखिरकार विराम लग गया है। 28 फरवरी से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में ‘डेडलाइन’ से महज डेढ़ घंटा पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष विराम (सीजफायर) का ऐलान कर दिया। ट्रंप के अनुसा ईरान के साथ सभी विवादित मुद्दों पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है और अगले दो हफ्तों में समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

10 सूत्रीय प्रस्ताव

इस कूटनीतिक समाधान में पाकिस्तान ने मुख्य भूमिका निभाई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने खुलासा किया कि उन्हें ईरान की ओर से एक 10 सूत्रीय व्यवहारिक प्रस्ताव मिला है। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के भरोसे के बाद अब ईरान ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को खोलने के लिए तैयार हो गया है। आगामी 10 अप्रैल को पाकिस्तान में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच निर्णायक वार्ता होगी।

ईरान की शर्तें: ‘अस्तित्व की लड़ाई’ में जीत का दावा

भले ही युद्ध की शुरुआत में ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और IRGC के शीर्ष जनरलों को खो दिया था, लेकिन वर्तमान शासन इस सीजफायर को अपनी बड़ी “कूटनीतिक जीत” के रूप में देख रहा है। ईरान के प्रमुख प्रस्तावों में शामिल हैं:

  • परमाणु अधिकार: यूरेनियम संवर्धन की वैश्विक स्वीकृति।
  • प्रतिबंधों की समाप्ति: अमेरिका द्वारा ईरान पर लगे सभी प्राथमिक प्रतिबंध हटाना।
  • सैन्य वापसी: खाड़ी क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी और सैन्य अड्डों को बंद करना।
  • सुरक्षा गारंटी: भविष्य में ईरान पर हमला न करने की अंतरराष्ट्रीय गारंटी और युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा।
  • क्षेत्रीय शांति: लेबनान और गाजा में भी युद्ध विराम की शर्त।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ‘विनाशकारी’ प्रहार

भले ही बंदूकें शांत हो गई हों, लेकिन इस युद्ध ने दुनिया को 1970 के दशक जैसे गहरे आर्थिक संकट में धकेल दिया है।

  • जीडीपी को झटका: दुनिया की जीडीपी को अब तक लगभग 54.88 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
  • भारत पर असर: भारतीय निवेशकों के करीब 37 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं।
  • ऊर्जा संकट: कतर से LNG की आपूर्ति ठप होने और होर्मुज स्ट्रेट बंद रहने से यूरोप में औद्योगिक उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस्पात और रसायन निर्माताओं ने लागत बढ़ने के कारण 30% तक अतिरिक्त अधिभार लगा दिया है।
  • अमेरिका का खर्च: CSIS वाशिंगटन के अनुसार, इस युद्ध में अमेरिका के 7.49 लाख करोड़ रुपये (80.4 बिलियन डॉलर) स्वाहा हो चुके हैं।

निष्कर्ष: कूटनीति बनाम अनिश्चितता

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा ‘आपूर्ति व्यवधान’ करार दिया है। हालांकि सीजफायर से तात्कालिक राहत मिली है, लेकिन ईरान की जटिल शर्तें (जैसे सैन्य वापसी और परमाणु कार्यक्रम) भविष्य में समझौते के पूर्ण क्रियान्वयन पर सवालिया निशान खड़ा करती हैं। फिलहाल, दुनिया की नजरें 10 अप्रैल को होने वाली पाकिस्तान वार्ता पर टिकी हैं।


रिपोर्ट: राज कुमार सिन्हा

(बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ)


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