किसानों की अनदेखी पर भड़का भारतीय किसान संघ
मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की दी चेतावनी
- गेहूं खरीदी और डिफॉल्टर घोषित होने से मंडला के किसान परेशान
- 11 क्विंटल प्रति बीघा खरीदी की उठाई मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. प्रदेश के किसानों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर भारतीय किसान संघ मण्डला ने मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। तहसील अध्यक्ष दिलीप चन्दौल के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में किसानों की आर्थिक स्थिति और सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। किसान संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि समस्याओं का शीघ्र निराकरण नहीं हुआ, तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
ज्ञापन में बताया गया है कि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की तारीख बार-बार बढ़ाने से किसानों में भारी असंतोष है। इससे किसानों को न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि उनकी अगली फसलों की योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। संघ ने मांग की है कि इस वर्ष गेहूं का बंपर उत्पादन हुआ है, अत: सरकार को 11 क्विंटल प्रति बीघा के हिसाब से खरीदी करनी चाहिए।
60 प्रतिशत किसान हुए डिफॉल्टर, बढ़ा ब्याज का बोझ
सहकारी बैंकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए संघ ने कहा कि 0 प्रतिशत ब्याज पर ऋण जमा करने की अंतिम तिथि 28 मार्च थी, जिसे बढ़ाया नहीं गया। दूसरी ओर सरकार ने गेहूं खरीदी की तारीख 10 अप्रैल तक बढ़ा दी है। ऐसी स्थिति में किसान पैसा कहाँ से जमा करेंगे? इसके चलते लगभग 60 प्रतिशत किसान डिफॉल्टर हो गए हैं और उन पर 7 प्रतिशत ब्याज व 14 प्रतिशत दंड का अतिरिक्त बोझ आ गया है। पिछले वर्ष ब्याज वापसी का वादा भी अभी तक अधूरा है।
पराली जलाने पर एफआईआर का विरोध
भारतीय किसान संघ ने गेहूं के खापे (पराली) जलाने पर किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जेल भेजने की कार्रवाई को देशद्रोही जैसा व्यवहार करार दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार पराली निपटान का कोई स्थायी हल नहीं निकाल लेती, तब तक किसानों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
बारदान की कमी और मूंग पंजीयन की मांग
ज्ञापन के माध्यम से शासन की अक्षमता पर प्रहार करते हुए कहा गया कि समय पर बारदान की व्यवस्था न होना घोर लापरवाही है, जिसका खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। इसके साथ ही संघ ने ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदी का पंजीयन तत्काल शुरू करने की मांग भी प्रमुखता से रखी है।










