टीईटी में फेल होना जीते जी मर जाने के समान

Advertisements

शिक्षकों का आर-पार का एलान

मप्र शासन की अनदेखी का खामियाजा भुगत रहे शिक्षक

  • टीईटी परीक्षा के विरोध में नैनपुर में एकजुट हुआ संयुक्त मोर्चा
  • आंदोलन की रणनीति तैयार
  • टीईटी में फेल होना जीते जी मर जाने के समान
  • अपमानजनक परीक्षा और अनिवार्य सेवानिवृत्ति के खिलाफ लामबंद हुए शिक्षक

मंडला महावीर न्यूज 29. अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के प्रांतीय आह्वान पर उत्कृष्ट विद्यालय नैनपुर में शिक्षकों की ब्लॉक स्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में आजाद अध्यापक शिक्षक संघ, ट्रायबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन, अपाक्स, मप्र शिक्षक संघ और मप्र कर्मचारी कांग्रेस के सैकड़ों शिक्षकों ने शिरकत की। सभी संगठनों ने एक स्वर में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा थोपी जा रही शिक्षक पात्रता परीक्षा को शिक्षकों की गरिमा, अनुभव और सामाजिक सम्मान के विरुद्ध बताया।

बैठक को संबोधित करते हुए संयुक्त मोर्चा के शिक्षक मनीष कटकवार ने बताया कि 25 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने आरटीई के तहत सभी शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य कर दिया है। विडंबना यह है कि आरटीई 2009 से लागू है, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने उस समय नियमों की अनदेखी की और पात्रता परीक्षा के आधार पर नियुक्तियां करती रही। 1998 से कार्यरत शिक्षाकर्मियों, गुरुजियों और संविदा शिक्षकों को जब 2018 में नियमित किया गया, तब भी शासन ने टीईटी की शर्त नहीं रखी।
बताया गया कि अब अचानक 25-30 वर्षों तक निष्ठापूर्वक शैक्षिक कार्य करने वाले 45-50 वर्षीय अनुभवी शिक्षकों को दो वर्ष के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। परीक्षा में असफल होने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति का प्रावधान किया गया है, जिसे शिक्षकों ने पूरी तरह अनुचित और दमनकारी बताया है।

सेवानिवृत्ति पर आर्थिक तबाही का डर 

वरिष्ठ शिक्षक नरेंद्र सिंह चौहान ने बैठक में शिक्षकों की आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 1998 के बाद भर्ती हुए शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन का कोई प्रावधान नहीं है। वर्तमान में सेवानिवृत्त हो रहे शिक्षकों को मात्र 2000 से 3000 रुपये पेंशन मिल रही है। ऐसे में यदि किसी शिक्षक को जबरन सेवानिवृत्त किया जाता है, तो उसके परिवार का भरण-पोषण नामुमकिन हो जाएगा। कई शिक्षकों पर लाखों का होम लोन और पर्सनल लोन है, जो उन्हें रातों-रात दिवालिया बना देगा।

तनाव और स्वास्थ्य पर बुरा असर 

संयुक्त मोर्चा के वरिष्ठ शिक्षक अजय सोनी ने कहा कि 45 से 55 वर्ष की आयु में अधिकांश शिक्षक बीपी, शुगर और हृदय रोगों से ग्रसित हैं। इस उम्र में परीक्षा का डर और करियर खोने का तनाव शिक्षकों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि शिक्षकों को इस भय से मुक्त किया जाए।

सम्मान पर चोट, जीते जी मर जाने जैसा 

मोर्चा के संजीव सोनी ने भावुक होते हुए कहा कि शिक्षक समाज का दर्पण होता है और उसे सदैव सर्वोच्च सम्मान मिला है। यदि एक अनुभवी शिक्षक परीक्षा में फेल होकर अनिवार्य सेवानिवृत्ति पाता है, तो उसे समाज और परिवार में कदम-कदम पर अपमान सहना पड़ेगा। यह स्थिति एक शिक्षक के लिए जीते जी मर जाने के समान होगी।

एकजुटता की अपील 

वरिष्ठ शिक्षक दिनेश पटेल ने नवनियुक्त शिक्षकों से भी इस लड़ाई में साथ आने की अपील की। उन्होंने कहा कि पूर्व में अलग-अलग संगठनों में बंटे होने के कारण सरकारों ने हमेशा शिक्षकों का शोषण किया है। आज परिस्थितियां ऐसी हैं कि पुराने और नए सभी शिक्षकों को एक मंच पर आना ही होगा, वरना भविष्य में सभी को भारी शोषण का शिकार होना पड़ेगा।

आंदोलन की घोषणा, जिला से लेकर राजधानी तक गूंजेगी आवाज 

संयुक्त मोर्चा के वरिष्ठ शिक्षक शंकर दयाल बाजपेई ने आगामी आंदोलनों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि आगामी 08 अप्रैल को जिला स्तर पर विशाल रैली और ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। 18 अप्रैल को भोपाल में प्रदेश स्तरीय जंगी प्रदर्शन और घेराव करने की रणनीति बनाई गई है। बैठक में नैनपुर ब्लॉक के प्रत्येक शिक्षक से 08 अप्रैल को मंडला में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होने का संकल्प लिया गया।

शिक्षकों की प्रमुख मांगें 

उच्च माध्यमिक शिक्षक दिलीप शरणागत, बीएसी संतोष यादव, अनुपमा तिवारी, प्रीति चौहान, प्रीति मसराम, नंदकिशोर कटारे, इंद्रेश तिवारी, तुलसी राम बंदेवार, राकेश राठौर, विजेंद्र वरकड़े, भरत विक्रम, हरिओम सिरोठिया, सेवाराम राजपूत, ईवनीश खान, नफीस खान, मुकुंद चंदेला, वीर सिंह चंदेला सहित उपस्थित सभी शिक्षकों ने मांग की है कि अन्य राज्यों की तर्ज पर मध्यप्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करे या केंद्र सरकार पर अध्यादेश लाने का दबाव बनाए। प्रदेश के 1.5 लाख और देश के 25-30 लाख शिक्षकों को टीईटी जैसी अपमानजनक परीक्षा से मुक्ति दी जाए। 28 वर्षों से कार्यरत शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता देते हुए पेंशन और ग्रेच्युटी की गणना की जाए। इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षक अब अपने सम्मान और अधिकारों के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करने को तैयार हैं।



 

Leave a Comment

Recent Post

Live Cricket Update

Advertisements

Read More Articles