दस वर्ष में 288 क्लब फुट के बच्चों को मिला नया जीवन
- आरबीएसके कार्यक्रम बना वरदान
- दिव्यांगता से उबर कर बच्चे जी रहे सामान्य जीवन
मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जन्मजात टेढ़े पैर से ग्रसित बच्चों को नया जीवन मिल रहा है। पिछले दस वर्षों में 288 बच्चों को इस दिव्यांगता से मुक्ति मिली है, जिससे उन्हें समाज में सामान्य जीवन जीने की उम्मीद मिली है। यह उपलब्धि जिला चिकित्सालय मंडला में आयोजित उपचार शिविर और क्योर इंटरनेशनल सहयोगी संगठन के प्रयासों से संभव हो पाई है। बताया गया कि गुरूवार पांच जून को जिला चिकित्सालय मंडला में आयोजित शिविर में अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. सूरज मरावी ने आरबीएसके के अंतर्गत चिन्हित 15 बच्चों का सफलतापूर्वक उपचार किया। इन बच्चों का उपचार सीटीईवी पोनसिटी मेथड के माध्यम से किया गया, जिससे उनके तिरछे पैर बिल्कुल सीधे हो गए। इनमें 6 बच्चों की कास्टिंग, 4 बच्चों को सीटीईवी शूज, 4 बच्चों का फॉलो-अप और 1 बच्चे का टीनोटॉमी सर्जरी के बाद टोटल करेक्शन किया गया।

जिला समन्वयक अर्जुन सिंह ने बताया कि आरबीएसके कार्यक्रम के तहत पिछले दस वर्षों में जिले के 288 क्लब फुट के बच्चों को लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015-16 में 13 बच्चे, 2016-17 में 12, 2017-18 में 27, 2018-19 में 43, 2019-20 में 34, 2020-21 में 21, 2021-22 में 29, 2022-23 में 35, 2023-24 में 26, 2024-25 में 33 और 2025-26 में अब तक 15 बच्चों को इस बीमारी से उबरने का मनोबल मिला है।
मितांश के पैर हो गए पूरी तरह ठीक
नैनपुर ब्लॉक के हीरापुर गांव की बेबी मितांश भाँवरे इस कार्यक्रम की सफलता का जीवंत उदाहरण है। 16 मई 2024 को जन्मी मितांश को जन्मजात क्लब फुट था, जिससे उसके माता-पिता घबरा गए थे। गांव की आशा कार्यकर्ता ने नवजात की स्क्रीनिंग के बाद उन्हें समझाया और आरबीएसके टीम को सूचित किया। क्योर इंटरनेशनल संस्था के सहयोग से मितांश की लगातार 8 बार जिला चिकित्सालय मंडला में कास्टिंग हुई। इसके बाद पैर सीधे हुए और करेक्शन के लिए टीनोटॉमी सर्जरी की गई। क्योर इंटरनेशनल के माध्यम से मिले विशेष शूज को लगातार पहनने के बाद बच्चे का पैर अब पूरी तरह ठीक है। मितांश के साथ ही अन्य बच्चों का इस शिविर में उपचार किया गया, उनमें शिवान्या पुरोहित, प्रियांश भवेदी, अभय साहू, तेजस सिंह, युंश धुर्वे, निधि रतन, शिवांगी बैरागी, निवेश गुप्ता, निलेश मरावी, देवांश मरकाम, सूर्यांश मरावी, निधि मरावी, सानवी पटेल और गौरव झरिया शामिल हैं।
चिकित्सकों की अपील
अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. सूरज मरावी ने क्लब फुट के लक्षणों को पहचानने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पैर का असामान्य आकार, पैर के सामने के हिस्से का अंदर की ओर मुडऩा, पैर की उंगलियों का नीचे की ओर मुडऩा, पैर का बाहरी किनारे पर टिकना, पैर की गतिविधियों में कठोरता और एड़ी की कसी हुई नस के कारण पैर की उंगलियों का पिंडली को न छू पाना इसके मुख्य लक्षण हैं।
प्रारंभिक चरण में कराए उपचार
सिविल सर्जन, डॉ. विजय सिंह धुर्वे ने बताया कि पिछले दस सालों में 288 से अधिक बच्चों को लाभ मिला है। उन्होंने सभी जन समुदाय से अपील की है कि यदि किसी को क्लब फुट का बच्चा मिलता है, तो उसे तुरंत जिला चिकित्सालय के डीईआईसी में रजिस्ट्रेशन कराएं जिससे समय रहते उपचार हो सके। उन्होंने सभी डिलीवरी प्वाइंट स्टाफ से भी नवजात स्क्रीनिंग के बाद ऐसे बच्चों को तुरंत जिला चिकित्सालय रेफर करने का आग्रह किया है। सीएमएचओ डॉ. केसी सरोते ने बताया कि क्लब फुट एक जन्मजात विकृति है जो प्रति वर्ष 1000 जीवित जन्मों में 1-2 नवजात में पाई जाती है। यदि इसे प्रारंभिक चरण में उपचारित नहीं किया जाता है, तो यह जीवन भर दिव्यांगता का कारण बन सकती है। शिविर में सिविल सर्जन डॉ. विजय सिंह धुर्वे, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वायके झरिया, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डीके मरकाम, आरबीएसके डीईआईसी प्रबंधक अर्जुन सिंह, वीरेंद्र पाटिल, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. निदा आफरीन, क्योर इंटरनेशनल काउंसलर ज्ञानेश्वरी धार्या, अनुष्का फाउंडेशन शैलेन्द्र श्रीवास समेत अन्य सदस्य उपस्थित रहे।














