ऋषि-मुनियों के ज्ञान से सीखें, प्रकृति को बचाएं: राज कुमार सिन्हा

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विश्व पर्यावरण दिवस: भारत की प्राचीन परंपराएं और वर्तमान पर्यावरणीय संकट

  • ऋषि-मुनियों के ज्ञान से सीखें, प्रकृति को बचाएं: राज कुमार सिन्हा

मंडला महावीर न्यूज 29. आज 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है, और इस अवसर पर राज कुमार सिन्हा, बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ  ने भारत की प्राचीन पर्यावरणीय परंपराओं और वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों पर प्रकाश डाला है। सिन्हा का कहना है कि भारत के ऋषि-मुनि पृथ्वी के आधार, जल और जंगल के महत्व को बखूबी समझते थे, जिसका प्रमाण उनके सूत्र ‘वृक्षाद् वर्षति पर्जन्य: पर्जन्यादन्न सम्भव:’ में मिलता है, जिसका अर्थ है कि वृक्ष जल है, जल अन्न है और अन्न ही जीवन है। उन्होंने जंगल को आनंददायक बताते हुए ‘अरण्यं ते पृथिवी स्योनमस्तु’ का उल्लेख किया और बताया कि कैसे हिन्दू जीवन के ब्रह्मचर्य, वानप्रस्थ और संन्यास आश्रमों का सीधा संबंध वनों से रहा है।

सिन्हा ने इस बात पर जोर दिया कि भले ही भारत में भौतिक विकास की अंधी दौड़ ने प्रकृति को कुचला है, लेकिन यदि ऋषि-मुनियों की परंपराएं न होतीं तो भारत की स्थिति पश्चिमी देशों जैसी गंभीर होती। हिन्दू धर्म में प्रकृति पूजन को प्रकृति संरक्षण के तौर पर मान्यता दी गई है, जहाँ पेड़-पौधों, नदियों, पर्वतों, ग्रहों, अग्नि और वायु को मानवीय रिश्तों से जोड़ा गया है। पेड़ की तुलना संतान से और नदी को माँ स्वरूप माना गया है। ऋग्वेद का पहला मंत्र भी अग्नि की स्तुति में रचा गया है, जो प्रकृति से हिन्दू धर्म के गहरे रिश्ते को दर्शाता है।

वर्तमान पर्यावरणीय संकट: चिंताजनक आंकड़े

राज कुमार सिन्हा ने पश्चिमी औद्योगिक विकास के बाद विश्व में पर्यावरणीय गिरावट के चरम पर पहुँचने पर चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, यह गिरावट मनुष्य की उपभोग की बढ़ती लालसाओं का परिणाम है। भारत में भी स्थिति चिंताजनक है:

  • वन आवरण में कमी: वर्ष 2001 से 2020 के बीच भारत में 1.93 मिलियन हेक्टेयर वृक्ष आवरण की कमी हुई है, जो वर्ष 2000 से 5.2% की कमी के बराबर है। पिछले तीस वर्षों में भारत ने 6,68,400 हेक्टेयर जंगल खो दिया है।
  • नदी प्रदूषण: स्टेट ऑफ एनवायरमेंट (एसओई) रिपोर्ट 2023 के अनुसार, देश की कुल 603 नदियों में से 279 यानी 46% नदियाँ प्रदूषित हैं। महाराष्ट्र में सर्वाधिक 55 और मध्य प्रदेश में 19 नदियाँ प्रदूषित हैं।
  • प्लास्टिक प्रदूषण: भारत विश्व में प्लास्टिक प्रदूषण में पहले स्थान पर है, प्रतिवर्ष 93 लाख मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा पैदा करता है।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभाव: भारत में तापमान में बढ़ोतरी, बारिश के पैटर्न में बदलाव, सूखे की स्थिति में वृद्धि, भूजल स्तर का गिरना, ग्लेशियरों का पिघलना, तीव्र चक्रवात, समुद्र का जल स्तर बढ़ना, और भूस्खलन व बाढ़ की घटनाएँ आम हो गई हैं।

वैश्विक स्थिति और समाधान की आवश्यकता

राज कुमार सिन्हा ने ‘वैश्विक प्रकृति संरक्षण सूचकांक 2024’ की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया, जिसमें 180 देशों में भारत को 176वें स्थान पर रखा गया है, जो पर्यावरणीय संरक्षण में देश की पिछड़ी स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जंगल और घास के मैदान प्राकृतिक फिल्टर के रूप में हमारी हवा और पानी को शुद्ध करते हैं, और मनुष्य की बढ़ती लालसाओं के कारण जल, जंगल और जमीन की समस्या आज केंद्रीय समस्या बनकर उभरी है।

सिन्हा ने अपने वक्तव्य का समापन इस बात पर जोर देते हुए किया कि मनुष्य और प्रकृति एक दूसरे के पूरक हैं, और दोनों का साथ और सहयोग ही पृथ्वी को हरा-भरा और खूबसूरत बना सकता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि हम इस पूरकता को भूलते जा रहे हैं, और विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर यह एक गंभीर चिंतन का विषय है।

राज कुमार सिन्हा 

बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ



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