रोपा से बेहतर है खेत में डीएसआर पद्धति से धान की खेती

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  • रोपा से बेहतर है खेत में डीएसआर पद्धति से धान की खेती
  • फुल पेज सवा 134 एफपी सवाना धान से मिल रही अच्छी पैदावार
  • लागत और मेहनत भी कम और पैदावार भी ज्यादा
  • फुल पेज सवाना धान के जिला एमडीओ ने किसान के खेत में किया फसल प्रदर्शन

मंडला महावीर न्यूज 29. जनपद पंचायत नैनपुर की ग्राम पंचायत बीजेगांव के पोषक ग्राम कटारे मोहगांव के किसानो के खेत में डीएसआर पद्धति से लगाई गई धान की फुल पेज सवा 134 किस्म सवाना धान का फसल प्रदर्शन किया गया। इस फसल प्रदर्शन में मंडला से आए जिला एमडीओ गोविंद वंदेवार द्वारा किसान के बीच पहुंचे और किसानों ने उनके सामने लगाई गई फसल का प्रदर्शन किया। श्री वंदेवार ने सभी किसानों को जागरूक करते हुए बताया की यह फसल में सादा लामा लमेरा जो धान होती है वह पूरी तरह खत्म हो जाती है। इसमें सिर्फ वही धान बचती है जो किसान ने लगाया हुआ है। इन्होंने बताया की जो रोपा होता है उसकी अपेक्षा यह बोआर में सादा लामा सजवान लामेरा की दिक्कत खत्म हो जाती है।

किसान तोषण प्रसाद कटारे ने फसल प्रदर्शन में आए अधिकारियों एवं उपस्थित ग्रामीणों को बताया कि रोपा पद्धति का प्रयोग कर उपज की गई धान में लागत के साथ साथ कड़ी मेहनत की समस्या का सामना करना पड़ता हैं लेकिन फुल पेज सवा 134 एफपी सवाना धान से सीधे डीएसआर(बुआर) करके लागत की बचत की जा सकती है। इसके साथ ही कम मेहनत में ज्यादा पैदावार होती है। फसल प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से किसान मोर्चा महामंत्री अमित कटारे, जीआरएस संजय कटारे, वरिष्ठ किसान संतोष कटारे, पुतर्रा पंचायत सचिव बनवारी धुर्वे, छोटू पूसाम, करण मरावी, तीतू सिंह मरावी, मिस्टर मरावी, सुरेश उइके, ग्राम कोटवार राजेंद्र सोनवानी, गजराज परते, सोहन पंडा, अरविंद सरोते, गंगाराम मरकाम, रेवा मर्सकोले, मनुआ मरकाम समेत ग्राम के किसान मौजूद रहे।

इनका कहना है

मैने इस मानसून सत्र में फुल पेज धान सवाना कंपनी की डीएसआर विधि से बोनी की थी। मुझे यह धान रोपा से भी अच्छी लगा है। इस धान में कल्ले फूटते है एवं इसका जो नींदा नाशक आता है वह सभी नींदा खरपतवार अन्य धान को नष्ट कर देता है।
तोषण प्रसाद कटारे
वरिष्ठ किसान, कटारे मोहगांव

मैने अपनी कृषि भूमि में विगत वर्ष धान की फसल डीएसआर पद्धति से फुल फैज सवा 134 एफपी सवाना धान की बुआई की थी, जिसकी फसल अपेक्षा से ज्यादा पैदावार हुई और इसमें लागत भी कम लगी। इसलिए मैं सभी को रोपा पद्धति की अपेक्षा डीएसआर पद्धति उपयोग करने की सलाह देता हूं।
दयाराम गुमास्ता
वरिष्ठ किसान, तुइयापानी

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