- संस्कृत संसार की प्राचीनतम व प्रथम भाषा
- संस्कृत कई भारतीय भाषाओं की है जननी
- संस्कृत भारत को एकता के सूत्र में बांधती है
- संस्कृत सप्ताह का हुआ समापन
मंडला महावीर न्यूज 29. संस्कृत सप्ताह का समापन कार्यक्रम संस्कृत भारती के जिला संपर्क प्रमुख राजकुमार सोनी के निवास स्थान देवदरा में आयोजित किया गया। सरस्वती वंदना के बाद ध्येय मंत्र का उच्चारण साहित्य प्रमुख राहुल दुबे के द्वारा किया गया। इस बीच संस्कृत भारती के विभाग संयोजक प्रमोद शुक्ल, जिला अध्यक्ष अरविंद शुक्ल, जिला मंत्री पूजा ज्योतिषी, साहित्य प्रमुख राहुल दुबे मंच पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान बिछिया विकासखंड से आई हुई छात्राओं द्वारा संस्कृत गीत, भाषण, नृत्य, नाटक एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। वहीं जिला शिक्षण प्रमुख नीता तिवारी द्वारा संस्कृत गीत सुनाया।
कार्यक्रम का संचालन नीता तिवारी एवं आभार प्रदर्शन राजकुमार सोनी द्वारा किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में संस्कृत भारती महाकौशल प्रांत जिला मंडला के विभाग संयोजक प्रमोद शुक्ल ने संस्कृत भाषा में वेद मंत्र व गीता के श्लोक का वादन कर संस्कृत के ज्ञान की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा संस्कृत ज्ञान की अभिव्यक्ति की भाषा है। संस्कृत भारत को एकता के सूत्र में बांधती है। संस्कृत संसार की प्राचीनतम व प्रथम भाषा है। यह कई भारतीय भाषाओं की जननी है। इसके अध्ययन अध्यापन से भारतीय भाषाओं में अधिक एकरूपता आयेगी।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में संस्कृत भारती के विभाग संयोजक प्रमोद शुक्ल, जिला मंत्री पूजा ज्योतिषी, जिला शिक्षण प्रमुख नीता तिवारी, जिला संपर्क प्रमुख राजकुमार सोनी, सह संपर्क प्रमुख हेमंत सारथी, नगर संयोजिका सुशीला ज्योतिषी, अनंता कोरी, कृतिका चौबे, उत्कर्ष तिवारी, सिफा यादव, रिया यादव, ईशा जोगी, प्रतिभा यादव, भुवनेश्वर प्रसाद, पूजा सोनी, सुलोचना सहित अन्य उपस्थित रहे।
इनका कहना है
संस्कृत विश्व की सबसे समृद्ध भाषा है। संस्कृत हमारी देववाणी कहलाती है। संस्कृत में दुनिया की किसी भी भाषा से ज्यादा शब्द है। वर्तमान में संस्कृत के शब्दकोष में 102 अरब 78 करोड़ 50 लाख शब्द है। अगर हम वर्णमाला की बात करें तो हिंदी में 52 अक्षर हैं, अंग्रेजी में 26 और संस्कृत में 46 अक्षर हैं। संस्कृत को संस्कारित करने वाले भी कोई साधारण भाषाविद् नहीं बल्कि महर्षि पाणिनि, महर्षि कात्यायन और योगशास्त्र के प्रणेता महर्षि पतंजलि हैं। इन तीनों महर्षियों ने बड़ी ही कुशलता से योग की क्रियाओं को भाषा में समाविष्ट किया है। यही इस भाषा का रहस्य है।
संस्कृत केवल एक मात्र भाषा नहीं है अपितु संस्कृत एक विचार है। संस्कृत एक संस्कृति है एक संस्कार है संस्कृत में विश्व का कल्याण है, शांति है, सहयोग है, वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना है। संस्कृत भाषा के विकास से ही भारतीय संस्कृति एवं संस्कार रक्षित होगा।















