- ग्रामीणों ने लिया नांदिया नाला को पुर्नजीवित करने का संकल्प
- जल गंगा संवर्धन अभियान में किया जा रहा है गहरीकरण
- ग्राम स्तरीय जल संसद एवं श्रमदान अभियान आयोजित

मंडला महावीर न्यूज 29. जल संरक्षण के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत मंड़ला विकासखंड के ग्राम पंचायत मलारा में चिन्हित स्थानों पर नांदिया नाला के पुनर्जीवन के लिए गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है। ग्राम पंचायत मलारा के पोषक ग्राम कोटा में नांदिया नाला के तट पर ग्राम स्तरीय जल संसद एवं श्रमदान अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के प्रथम चरण में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नांदिया नाला के गहरीकरण में श्रमदान किया। नांदिया नाले के जिस क्षेत्र में श्रमदान कर नाले की गाद निकाली गई, वहां झीर से पानी निकलने लगा। ग्रामीणों को विश्वास हो गया कि निरंतर गाद निकालने, गहरीकरण और चौड़ीकरण के साथ बारिश के बाद जल रोकने के उपाय करने और सघन वृक्षारोपण करने से नाला बारहमासी हो जाएगा। गहरीकरण से निकाले गए गाद से नाला के तट के धार्मिक महत्व के पेड़ के चारों ओर अस्थाई चबूतरा बनाया गया।

दूसरे चरण में ग्राम स्तरीय जल संसद का आयोजन किया गया। जल संसद का आयोजन मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद की नवांकुर संस्था ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति, मडईजर एवं परम्परागत, जड़ी-बूटी एवं वैकल्पिक चिकित्सा विकास परिषद एवं अनुसंधान केंद्र ने संयुक्त रुप से किया। संतोष धुर्वे ने जल संसद की प्रस्तावना रखी। जनपद सदस्य श्रीमती सुनीता परते ने नांदिया नाला को उसके पूर्व रुप में लाकर नदी के रुप में परिवर्तित करने का संकल्प लिया।
मलारा ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच किशन उइके ने ग्रामीणों से आव्हान किया कि हर घर में कम से कम एक पौधा लगाएं और उसे संरक्षित भी करें। नदी पुर्नजीवन के लिए कार्यरत सामाजिक कार्यकर्ता गजेन्द्र गुप्ता ने बताया कि नांदिया नाला नर्मदा के सहायक नदी बंजर में मिलती है। नर्मदा में पानी नदी जलग्रहण क्षेत्र के नदी -नालों से आता है। नांदिया नाला को पुर्नजीवित कर हम नर्मदा को सदा नीरा रखने में सहयोगी बनेंगे। गजेन्द्र गुप्ता ने नांदिया नाला पुनर्जीवन के लिए विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की।
जल संसद में उपस्थित ग्रामीणों ने नर्मदा की सह सहायक नदी नांदिया को पुर्नजीवित करने का संकल्प लिया। जल संसद का संचालन संतोष धुर्वे एवं आभार प्रर्दशन सुकरात पंद्रों ने किया। श्रमदान और जल संसद के आयोजन में ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति, खापाकला के सतीश परतें एवं स्थानीय ग्रामीण देवराम, सरजू मर्सकोले, राजेश मरकाम, सुरेश मरकाम, विनोद उइके की भूमिका रही।














