मंडला-डिंडोरी-अमरकंटक रेल लाइन
FLS मंजूरी का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड पहुंचा, वर्षों पुरानी मांग को मिली नई दिशा
- आदिवासी अंचल में रेल कनेक्टिविटी की उम्मीद
- मंडला फोर्ट से पेंड्रा रोड तक नई लाइन के सर्वे प्रस्ताव पर रेलवे बोर्ड करेगा फैसला
मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बहुल मंडला और डिंडोरी क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित रेल कनेक्टिविटी की दिशा में एक बड़ी प्रशासनिक प्रगति सामने आई है। मंडला फोर्ट से डिंडोरी होते हुए अमरकंटक–पेंड्रा रोड तक प्रस्तावित नई रेल लाइन के ‘अंतिम स्थान सर्वेक्षण’ (FLS) की स्वीकृति के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR), बिलासपुर ने प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। 9 सितंबर 2026 को रेलवे द्वारा दिए गए एक आधिकारिक जवाब में इस बात की पुष्टि की गई है।
प्रस्ताव की स्थिति और वास्तविकता
SECR के उप मुख्य परिचालन प्रबंधक (योजना एवं संरक्षा) अमित सिंह द्वारा जारी जवाब में बताया गया है कि श्रीधाम–जबलपुर–मंडला फोर्ट रेल लाइन पहले से परिचालन में है। इसके आगे के हिस्से (मंडला फोर्ट-डिंडोरी-अमरकंटक-पेंड्रा रोड) के लिए FLS का प्रस्ताव बोर्ड के पास है। रेलवे ने यह स्पष्ट किया है कि 9 सितंबर का यह पत्र 406.2 किलोमीटर लंबे पूरे कॉरिडोर के निर्माण की अंतिम मंजूरी नहीं है, बल्कि यह सर्वेक्षण की दिशा में उठाया गया पहला महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है। FLS स्वीकृत होने के बाद ही वित्तीय और तकनीकी प्रक्रियाएं आगे बढ़ेंगी।
इन प्रयासों से मिली सफलता
यह मामला रेल कार्यकर्ता नितिन सोलंकी द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और रेल मंत्रालय में CPGRAMS के माध्यम से लगातार उठाए जाने के बाद गति पकड़ सका। इसके अलावा, बिछिया विधायक नारायण सिंह पट्टा और गोटेगांव विधायक नागेश महेश द्वारा लिखे गए पत्रों ने भी इस प्रस्तावित ‘नर्मदा–विंध्य रेल कॉरिडोर’ (पेंड्रा रोड–अमरकंटक–डिंडोरी–मंडला–घंसौर–लखनादौन–श्रीधाम) की मांग को मजबूती दी।
पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा पंख
इस रेल लाइन के साकार होने से मंडला और डिंडोरी जैसे आदिवासी बहुल जिलों की तस्वीर बदल सकती है:
- पर्यटन: अमरकंटक और कान्हा-किसली नेशनल पार्क तक पर्यटकों की पहुंच बेहद आसान हो जाएगी।
- व्यापार व रोजगार: लंबी दूरी के लिए सिर्फ सड़क परिवहन पर निर्भर इस क्षेत्र में व्यापार, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- वैकल्पिक मार्ग: यह लाइन जबलपुर और बिलासपुर के बीच एक शानदार वैकल्पिक रेल संपर्क के रूप में काम करेगी।
आगे की राह और उम्मीदें
रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी ने इस प्रगति को सोशल मीडिया अभियान, PMO में शिकायत और जनप्रतिनिधियों से निरंतर संवाद का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि वर्षों पुरानी मांग का रेलवे बोर्ड की मेज तक पहुंचना एक अहम पड़ाव है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें रेलवे बोर्ड पर टिकी हैं कि वह इस FLS प्रस्ताव को कब मंजूरी देता है और आदिवासी अंचल का यह सपना किस गति से जमीन पर उतरता है।










