घुघरी में बिजली विभाग की तानाशाही
भीषण गर्मी में 20 से ज्यादा बार अघोषित कटौती
- मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
- घंटों गुल रहती है बत्ती, एक तरफ कनिष्ठ अभियंता के रटे-रटाए बहाने
- दूसरी तरफ दो कमरों के मकानों पर थोपे जा रहे भारी जुर्माने
मंडला महावीर न्यूज 29. भीषण गर्मी की शुरुआत होते ही घुघरी क्षेत्र में विद्युत विभाग की लचर व्यवस्था और संवेदनहीनता खुलकर सामने आने लगी है। पूरे साल चैन की नींद सोने वाला अमला अब आंधी-तूफान के मौसम में मेंटेनेंस का ढोंग रच रहा है, जिसके कारण क्षेत्र की जनता का जीना मुहाल हो गया है। दिनभर में करीब 20 से अधिक बार हो रही अघोषित बिजली कटौती और ट्रिपिंग ने स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों को संकट में डाल दिया है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि विगत दिनों सुबह 5 बजे से बंद हुई बिजली देर रात करीब 12 बजे बहाल हो सकी। इस अव्यवस्था को लेकर जब विद्युत विभाग के कनिष्ठ अभियंता (जेई) चेतराम बैगा से संपर्क किया जाता है, तो उनके पास हमेशा एक रटा-रटाया जवाब होता है कि पेड़ की डाली गिरने के कारण बिजली बंद है। अब जनता यह सवाल उठा रही है कि यदि बिजली लाइनों के पास मौजूद पेड़ों की छंटाई का काम समय रहते ठंड या कड़ाके की धूप के दिनों में कर लिया जाता, तो आज यह नौबत क्यों आती? मेंटेनेंस के नाम पर हर साल आने वाला लाखों रुपये का बजट कहाँ ठिकाने लगाया जा रहा है, इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
कार्रवाई के नाम पर गरीबों का उत्पीडऩ
एक तरफ जहां विभाग चौबीस घंटे सुचारू बिजली देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। यदि किसी गरीब के पास महज दो कमरों का मकान है और वह एक कमरे में अपनी जीविका चलाने के लिए कोई छोटी-मोटी दुकान खोल लेता है, तो विभाग उन पर दूसरा व्यावसायिक मीटर लगवाने का दबाव बना रहा है। उपभोक्ताओं की मजबूरी को समझे बिना उन पर मनमाने तरीके से 10 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक के भारी-भरकम जुर्माने थोपे जा रहे हैं, जिसे लेकर लोगों में भारी आक्रोश है।
जनता ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
क्षेत्रीय जनता अब विद्युत विभाग के आला अधिकारियों और जिला प्रशासन से सीधे सवाल कर रही है कि क्या दो कमरों के छोटे से मकान में एक गरीब व्यक्ति अपनी आजीविका के लिए दो अलग-अलग मीटर लगवाए? ग्रामीणों और स्थानीय व्यापारियों ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि घुघरी क्षेत्र में बिजली की अघोषित कटौती पर तुरंत लगाम नहीं कसी गई और गरीबों का मानसिक व आर्थिक उत्पीडऩ बंद नहीं हुआ, तो क्षेत्र की जनता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।









