आदि उत्सव-रामनगर में गूँजा जनजातीय गौरव का शंखनाद
विरासत और विकास का अनूठा संगम
- मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्चुअली किया संबोधित
- केंद्रीय मंत्री जुएल ओरांव और सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने सराहा गोंडवाना का वैभव
मंडला महावीर न्यूज 29. नर्मदा तट पर स्थित ऐतिहासिक रामनगर में आदि उत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ, जिसमें जनजातीय अस्मिता, संस्कृति और शौर्य की त्रिवेणी प्रवाहित हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्चुअल माध्यम से उत्सव को संबोधित करते हुए इसे जनजातीय समाज की गौरवशाली परंपराओं को जीवित रखने वाला एक सशक्त मंच बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरासत से विकास के संकल्प को धरातल पर उतार रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्सव की भव्यता की तुलना होली-दीपावली से करते हुए कहा कि वर्ष 2016 से निरंतर आयोजित हो रहा यह उत्सव अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। उन्होंने मंडला की गोंडी और बैगा मातृबोलियों, पारंपरिक वाद्य यंत्रों (मांदल, गुदुम) और आभूषणों के संरक्षण पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती, राजा शंकरशाह और टंट्या भील जैसे वीर नायकों की शौर्य गाथाओं को याद करते हुए कहा कि यह उत्सव नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोडऩे का सबसे प्रभावी माध्यम है।

अटल जी की पहल और मोदी सरकार के प्रयास
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओरांव ने अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय गौरव को वैश्विक पहचान दिलाने की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने 1999 में पृथक मंत्रालय बनाकर की थी। उन्होंने बताया कि रामनगर के इस ऐतिहासिक महल के जीर्णोद्धार के लिए केंद्र सरकार ने राशि स्वीकृत की थी। वर्तमान में प्रधानमंत्री धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान और पीएम जनमन जैसी योजनाएं जनजातीय समाज के जीवन स्तर को ऊंचा उठा रही हैं।
राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक बना आदि उत्सव
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने गोंडी बोली में अपने संबोधन की शुरुआत कर सभी का दिल जीत लिया। उन्होंने कहा कि रामनगर का आदि उत्सव अब केवल एक क्षेत्रीय मेला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय अस्मिता का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने आधुनिकता के इस दौर में अपनी भाषा, रीति-रिवाज और परंपराओं को संजोकर रखने को अनिवार्य बताया।
युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है हमारा इतिहास
सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने गोंडवाना शासक राजा हृदय शाह और वीरांगना रानी दुर्गावती के शौर्य का स्मरण करते हुए कहा कि युवाओं को अपने वीर नायकों के इतिहास से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री जुएल ओरांव के नेतृत्व में देशभर के जनजातीय ऐतिहासिक स्थलों को नई पहचान दी जा रही है। उन्होंने उत्सव के दौरान आयोजित होने वाली ऐतिहासिक संगोष्ठियों में जनभागीदारी का आह्वान किया।
विशिष्ट प्रतिभाओं और राज परिवारों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान राज स्तम्भ पर ध्वजारोहण और मोतीमहल के शिलालेख का पूजन पारंपरिक विधि-विधान से किया गया। इस अवसर पर पद्मश्री अर्जुन सिंह धुर्वे, पद्मश्री भज्जू सिंह श्याम और सुश्री ऊषा वागले सहित अन्य जनजातीय प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। साथ ही 24 राज परिवारों के सदस्यों का कोया फूलमाला और साफा पहनाकर स्वागत किया गया। कक्षा 10वीं-12वीं की मेरिट सूची में स्थान पाने वाले मेधावी छात्रों और खेलो इंडिया के खिलाडिय़ों को भी मंच से पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष संजय कुशराम, विधायक कमलेश शाह, नपा अध्यक्ष विनोद कछवाहा सहित भारी संख्या में ग्रामीण, कलाकार और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।










