कान्हा में फिर गूंजी जंगली भैंसों की हुंकार

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कान्हा में फिर गूंजी जंगली भैंसों की हुंकार

पुनर्स्थापना का द्वितीय चरण सफलतापूर्वक संपन्न

  • असम के काजीरंगा से आए 4 नए मेहमान
  • 2220 किमी का सफर तय कर सुपखार पहुँचे वन्यजीव

मंडला महावीर न्यूज 29. विश्व विख्यात कान्हा टाइगर रिजर्व के लिए आज का दिन ऐतिहासिक उपलब्धियों भरा रहा। मध्यप्रदेश से लगभग 150 वर्ष पूर्व विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों को पुन: स्थापित करने के महाभियान के अंतर्गत द्वितीय चरण का सफल संचालन किया गया। कान्हा के सुपखार परिक्षेत्र में विशेष रूप से निर्मित बाड़े में चार और जंगली भैंसों के दल को सफलतापूर्वक मुक्त किया गया है।बताया गया कि इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) समिता राजोरा एवं अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एल. कृष्णमूर्ति ने विधिवत रूप से जंगली भैंसों को उनके नए आशियाने में निर्मुक्त किया। इस दौरान कान्हा प्रबंधन के आला अधिकारी, जिनमें क्षेत्र संचालक रविंद्र मणि त्रिपाठी, उप संचालक प्रकाश वर्मा, अमिथा केबी सहित समस्त सहायक संचालक और स्थानीय अमला मौजूद रहा।

50 भैंसों का लक्ष्य 

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार कान्हा का सुपखार क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से जंगली भैंसों का प्राकृतिक वास रहा है। यहाँ पूर्व में उनकी उपस्थिति के पुख्ता प्रमाण मिलते रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा से मध्यप्रदेश वन विभाग ने इस विलुप्तप्राय प्रजाति को वापस लाने की विशेष कार्ययोजना तैयार की है। परियोजना के प्रथम चरण में विगत माह 28 अप्रैल को मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं चार भैंसों को बाड़े में छोड़ा गया था। अब द्वितीय चरण के बाद कान्हा में कुल जंगली भैंसों की संख्या 8 जिसमें 2 नर और 6 मादा हो गई है। विभाग का लक्ष्य आगामी 3 वर्षों में कुल 50 जंगली भैंसों को यहाँ पुर्नस्थापित करना है।

72 घंटे का अनवरत सफर और 2220 किमी की दूरी 

इन वन्यजीवों को असम के काजीरंगा टाइगर रिजर्व से मंडला तक लाना एक बड़ी चुनौती थी। लगभग 2220 किलोमीटर की इस लंबी दूरी को सड़क मार्ग से तय किया गया। इस संवेदनशील परिवहन कार्य के लिए विशेष वन्यजीव वाहनों का उपयोग किया गया। पूरे सफर के दौरान दो अनुभवी वन्यजीव चिकित्सकों की टीम ने भैंसों के स्वास्थ्य की सतत निगरानी की। एक सहायक संचालक और एक परिक्षेत्र अधिकारी के नेतृत्व में पूरे दल ने बिना रुके लगभग 72 घंटे का सफर तय कर इन वन्यजीवों को सुरक्षित कान्हा पहुँचाया।

जैव विविधता संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर 

कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों और बारहसिंगा के सफल संरक्षण के बाद अब जंगली भैंसों की पुर्नस्थापना मध्यप्रदेश के पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक समृद्ध करेगी। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल न केवल जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे कान्हा में पर्यटन के नए द्वार भी खुलेंगे। सुपखार क्षेत्र में भैंसों की वापसी से मध्यप्रदेश के वन्यजीव इतिहास का एक पुराना पन्ना फिर से जीवित हो उठा है। अमले की इस सफलता पर वरिष्ठ अधिकारियों ने खुशी जाहिर करते हुए इसे वन विभाग के संकल्प और अथक परिश्रम का परिणाम बताया है।


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