क्या संवेदनाएं मर चुकी हैं? रसूखदारों की कार पार्किंग के लिए उजाड़ दिया गरीब का आशियाना
- भीषण गर्मी में बेघर हुई बेबस मां और विकलांग पति
- काम पर जाते ही नगरपालिका ने ध्वस्त कर दी झोपड़ी
मंडला महावीर न्यूज 29. नगरपालिका मंडला की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जहाँ एक ओर सरकार सबको आवास का नारा देती है, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय के गायत्री मंदिर के समीप नगरपालिका के अमले ने एक गरीब परिवार की झोपड़ी को मलबे में तब्दील कर दिया। आरोप है कि यह कार्रवाई किसी जनहित के लिए नहीं, बल्कि रसूखदारों की कारें खड़ी करने के लिए जगह बनाने हेतु की गई है।
पीठ पीछे हुई कार्रवाई, बच्चों पर भी नहीं आया तरस
पीडि़त महिला ने बिलखते हुए बताया कि वह अपने विकलांग पति और दो छोटे-छोटे बच्चों के साथ उस सरकारी भूमि पर झोपड़ी बनाकर रह रही थी। पीडि़त महिला ने बताया कि जैसे ही वह मजदूरी करने घर से बाहर गई, पीछे से नगरपालिका का दस्ता पहुँचा और आनन-फानन में उसकी झोपड़ी ध्वस्त कर दी। हैरानी की बात यह है कि इस भीषण गर्मी (40-45 डिग्री तापमान) के बीच कार्रवाई करते समय अधिकारियों को उन छोटे मासूम बच्चों और लाचार विकलांग व्यक्ति की हालत पर भी दया नहीं आई।
रसूखदारों के लिए गरीब की बलि
पीडि़त महिला का आरोप बेहद गंभीर है। उसका कहना है कि जिस स्थान पर वह वर्षों से रह रही थी, वहां कुछ रसूखदार अपनी कार खड़ी करना चाहते हैं। उन्हीं चहेतों को फायदा पहुँचाने के लिए नगरपालिका ने एक झटके में एक गरीब का सिर से साया छीन लिया। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि यदि भूमि सरकारी थी और अतिक्रमण हटाना ही था, तो आसपास के अन्य बड़े कब्जों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? केवल एक गरीब और लाचार परिवार को ही निशाना क्यों बनाया गया?
भीषण गर्मी में अब कहाँ जाए परिवार
झोपड़ी टूटने के बाद गृहस्थी का सामान सड़कों पर बिखरा पड़ा है। तपती दुपहरी में खुले आसमान के नीचे बैठे बच्चों और विकलांग पति की तस्वीरें नगरपालिका की संवेदनहीनता की कहानी बयां कर रही हैं। यह घटना प्रशासन की उस मानसिकता को दर्शाती है जहाँ नियम केवल कमजोरों के लिए होते हैं और रसूखदारों के ऐशो-आराम के लिए गरीबों की बलि चढ़ा दी जाती है।
न्याय दिलाने की मांग
अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप कर पीडि़त परिवार को न्याय दिलाता है या फिर यह परिवार इस भीषण गर्मी में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर रहेगा। आमजन अब सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से इन किस्मत के मारों का साथ देने की अपील कर रहे हैं।










