उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ेगा काशी तमिल संगमम एक्सप्रेस का प्रस्ताव

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उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ेगा काशी तमिल संगमम एक्सप्रेस का प्रस्ताव

  • रेल एक्टिविस्ट अथर्व सिंह की पहल
  • नए जबलपुर-नैनपुर-छिंदवाड़ा रेल मार्ग से कन्याकुमारी तक ट्रेन चलाने की मांग

मंडला महावीर न्यूज 29. महाकौशल क्षेत्र में रेल सुविधाओं के विस्तार और उपेक्षित रेल मार्गों को मुख्यधारा से जोडऩे की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। क्षेत्र के सक्रिय रेल एक्टिविस्ट अथर्व सिंह ने उत्तर भारत और दक्षिण भारत के मध्य बेहतर रेल संपर्क स्थापित करने और धार्मिक-सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने के लिए बनारस – कन्याकुमारी (काशी तमिल संगमम) एक्सप्रेस प्रारंभ करने का एक विस्तृत प्रस्ताव रेलवे मंत्रालय को भेजा है।

अथर्व सिंह द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू नवविकसित जबलपुर-नैनपुर-सिवनी-छिंदवाड़ा रेल कॉरिडोर का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। वर्तमान में इस मार्ग पर रेल यातायात नगण्य है, जबकि यह क्षेत्र मुख्यत: आदिवासी बहुल और विकास की दृष्टि से पिछड़ा हुआ है। बताया गया कि प्रस्तावित ट्रेन का मार्ग प्रयागराज छिवकी, सतना, जबलपुर, नैनपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, नागपुर, चंद्रपुर, विजयवाड़ा, ओंगोल, रेनिगुंटा, तिरुचिरापल्ली और मदुरै होते हुए कन्याकुमारी तक रखने का सुझाव दिया गया है। यह मार्ग न केवल भौगोलिक दूरी कम करेगा, बल्कि काशी तमिल संगमम जैसी राष्ट्रीय पहल को एक व्यावहारिक धरातल प्रदान करते हुए उत्तर की काशी और दक्षिण के कन्याकुमारी को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करेगा।

अथर्व सिंह, रेल एक्टिविस्ट

रेलवे बोर्ड में कार्यवाही शुरू 

अथर्व सिंह द्वारा प्रेषित इस औपचारिक पत्र को रेलवे मंत्रालय ने गंभीरता से लेते हुए दर्ज किया है। वर्तमान में यह मामला रेलवे बोर्ड के संज्ञान में है और इस पर विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रस्ताव को रेलवे बोर्ड के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर रत्नेश कुमार झा के कार्यालय को आगामी कार्यवाही के लिए अग्रेषित किया गया है।

आदिवासी अंचल के लिए जीवनरेखा साबित होगी यह ट्रेन 

रेल एक्टिविस्ट अथर्व सिंह जो पिछले 7 वर्षों से क्षेत्र की रेल समस्याओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि जबलपुर-नैनपुर-सिवनी-छिंदवाड़ा-नागपुर सेक्शन एक नया विकसित मार्ग है। यहाँ के नागरिकों को आज भी लंबी दूरी की यात्रा के लिए सीधी ट्रेन सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण यात्रियों को बार-बार ट्रेन बदलकर यात्रा करनी पड़ती है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। इस रूट पर सीधी ट्रेन मिलने से आदिवासी अंचल सीधे प्रयागराज, नागपुर और चेन्नई जैसे बड़े केंद्रों से जुड़ जाएगा।

शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार को मिलेगी गति 

इस ट्रेन के संचालन से न केवल धार्मिक और पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सिवनी, छिंदवाड़ा और नैनपुर जैसे क्षेत्रों के युवाओं को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों के लिए बड़े शहरों तक पहुँचने में सुगमता होगी। यह ट्रेन क्षेत्रीय संतुलित विकास के सिद्धांत को चरितार्थ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

रेल प्रेमियों में एक नई उम्मीद जागी 

अथर्व सिंह की इस मांग ने महाकौशल और दक्षिण भारत के रेल प्रेमियों के बीच एक नई उम्मीद जगा दी है। जनहित और नए रेल मार्गों के समुचित दोहन को ध्यान में रखते हुए, अब गेंद रेलवे बोर्ड के पाले में है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो यह भारतीय रेलवे के नेटवर्क में एक क्रांतिकारी विस्तार होगा, जो उत्तर और दक्षिण के बीच की दूरियों को पाटकर सांस्कृतिक सेतु का निर्माण करेगा।

नोट

यह समाचार रिपोर्ट स्वतंत्र रेल एक्टिविस्ट द्वारा रेल मंत्रालय में दर्ज औपचारिक शिकायत और प्रस्ताव पर आधारित है। अंतिम निर्णय रेलवे बोर्ड के तकनीकी और परिचालन विभाग के अधीन है।


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