एक पेड़ माँ के नाम, यहाँ हो रहा कत्लेआम
सड़क निर्माण कंपनी ने बिना अनुमति 25 साल पुराने फलदार वृक्षों को किया जमींदोज
- सड़क निर्माण कंपनी ने फलदार पेड़ों को काट कर मिट्टी में दफनाया
- आमानाला में 25 वर्ष पुराने पेड़ों पर चला बुलडोजर
- प्रशासन को भी नहीं दी सूचना
मंडला महावीर न्यूज 29. एक ओर जहाँ देश के प्रधानमंत्री एक पेड़ माँ के नाम अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं, वहीं मंडला जिले में सड़क निर्माण के नाम पर फलदार और छायादार वृक्षों की बेदर्दी से हत्या की जा रही है। ताजा मामला जिला मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग 543 डिंडौरी-मंडला मार्ग पर स्थित ग्राम आमानाला का है, जहाँ सड़क निर्माण कंपनी ने बिना किसी पूर्व सूचना के दशकों पुराने फलदार पेड़ों को धराशायी कर दिया।
ग्राम आमानाला में सड़क निर्माण के दौरान तीन महत्वपूर्ण फलदार वृक्षों में एक 25 वर्षीय आंवला, 15 वर्षीय जामुुन और 12 वर्षीय आम के पेड़ को बुलडोजर के माध्यम से गिरा दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि इन पेड़ों को न केवल बेरहमी से काटा गया, बल्कि साक्ष्य छुपाने के लिए उन पर सड़क की मिट्टी डालकर उन्हें दफनाने का प्रयास भी किया गया। इस प्रक्रिया में नल-जल योजना की पाइपलाइन को भी भारी क्षति पहुँची है।
ग्रामीणों की अपील अनसुनी
जब स्थानीय ग्रामीणों ने पेड़ों को बचाने की विनती की और बताया कि पंचायत ने इन्हें व्यायामशाला परिसर में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है, तो मौके पर मौजूद अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी। ग्रामीणों ने जब पेड़ों की कटाई की अनुमति माँगी, तो अधिकारियों द्वारा न केवल उनसे दुर्व्यवहार किया गया बल्कि जबरन पेड़ों को सुरक्षा बाड़ सहित उखाड़ फेंका गया।
वन और राजस्व विभाग को नहीं दी कोई सूचना
हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर कृत्य की जानकारी न तो वन विभाग को थी और न ही राजस्व विभाग को। ग्रामीणों की सूचना पर पहुँचे वन परिक्षेत्र अधिकारी ने बिना अनुमति छायादार व फलदार वृक्षों के इस तरह के कटान पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अब बिना रिकॉर्ड संधारण के इन वृक्षों की लकड़ी का परिवहन किस प्रकार किया जाएगा।
प्रशासन ने की कार्रवाई, बनाया पंचनामा
मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार मंडला ने तत्काल पटवारी को मौके पर भेजकर पंचनामा तैयार कराया है। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विभाग के पास वृक्षों के काटने की कोई भी आधिकारिक सूचना नहीं थी। यदि विकास कार्य के लिए पेड़ काटना अनिवार्य था, तो नियमानुसार वन और राजस्व विभाग को विश्वास में लेकर ही यह प्रक्रिया पूरी की जानी थी।











