बबलिया खरीदी केंद्र में करोड़ों की धान का खेल

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बबलिया खरीदी केंद्र में करोड़ों की धान का खेल

4 महीने से भुगतान के लिए भटक रहे किसान, कर्मचारियों पर हेराफेरी के आरोप

  • बबलिया महाकौशल विपणन संघ की धान खरीदी में भारी धांधली
  • अपनों के खातों में डाला पैसा, असली किसान दाने-दाने को मोहताज
  • 500 क्विंटल धान गायब होने की चर्चा
  • आक्रोशित किसानों ने दी गेहूं खरीदी केंद्र बंद करने की चेतावनी

मंडला महावीर न्यूज 29. जिले के बबलिया स्थित महाकौशल विपणन खरीदी केंद्र में धान खरीदी को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आ रहा है। यहाँ समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले दर्जनों किसान पिछले 4 महीनों से अपने भुगतान के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, जबकि केंद्र के पूर्व प्रभारी और कर्मचारियों पर सरकारी धन और धान की हेराफेरी के गंभीर आरोप लगे हैं।

मामला तब गरमाया जब एक पीडि़त किसान आदिम जाति सेवा सहकारी समिति द्वारा संचालित वर्तमान गेहूं खरीदी केंद्र पहुँचा। किसान का आरोप है कि उसने लगभग 4 महीने पहले 36 क्विंटल धान केंद्र में बेची थी, जिसका भुगतान आज दिनांक तक नहीं हो सका है। इसके साथ एक अन्य किसान ने भी शिकायत बताते हुए पर्ची दिखाई की उसे भी करीब ढाई लाख रुपये का भुगतान नहीं किया गया है। किसान ने बताया कि पिछले 3 महीनों से कर्मचारी उसे आज-कल कहकर बहला रहे थे, लेकिन अब कर्मचारियों ने साफ मना कर दिया है कि आपकी धान केंद्र में आई ही नहीं है। इस बात से नाराज किसान और कर्मचारियों के बीच तीखी बहस हुई और किसान ने भुगतान न होने पर केंद्र बंद करने की चेतावनी दी है।

रिश्तेदारों के खातों में पैसा डालने का गंभीर आरोप 

जनचर्चा और स्थानीय सूत्रों ने बताया कि धान खरीदी के दौरान केंद्र में पदस्थ पूर्व प्रभारियों ने बड़ी चालाकी से भ्रष्टाचार को अंजाम दिया। आरोप है कि कर्मचारियों ने अपने सगे-संबंधियों और रिश्तेदारों के नाम पर फर्जी पंजीयन किए और किसानों द्वारा लाई गई वास्तविक धान को उन फर्जी खातों में चढ़ाकर सरकारी राशि का भुगतान अपने नाते-रिश्तेदारों के खातों में करवा दिया। यही कारण है कि वास्तविक किसानों का भुगतान आज तक पोर्टल पर लंबित या शून्य दिखाई दे रहा है।

500 क्विंटल धान लापता, जांच के घेरे में पूर्व अमला 

वर्तमान गेहूं खरीदी केंद्र में पदस्थ सर्वेयर संजय सिंगरौरे ने बताया कि जब से गेहूं खरीदी शुरू हुई है, तब से कई किसान धान की पर्ची लेकर भुगतान की गुहार लगा रहे हैं। बताया जा रहा है कि पूर्व में यहाँ महाकौशल विपणन संघ के माध्यम से धान खरीदी की गई थी, जिसका प्रभारी संतोष नामक कर्मचारी था। चर्चा है कि केंद्र में करीब 500 क्विंटल धान की कमी है, जिसे खुर्द-बुर्द कर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया है। अब संस्था बदल जाने के कारण वर्तमान कर्मचारी पुरानी गड़बडिय़ों से पल्ला झाड़ रहे हैं।

सीएम हेल्पलाइन भी बेअसर, किसानों ने लगाई न्याय की गुहार 

परेशान किसानों ने बताया कि उन्होंने इस धांधली की शिकायत 181 सीएम हेल्पलाइन पर भी की है, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। किसानों का कहना है कि एक तरफ सरकार कृषि को लाभ का धंधा बनाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर बिचौलिए और भ्रष्ट कर्मचारी किसानों की मेहनत की कमाई डकार रहे हैं।

प्रशासनिक दखल की मांग 

किसानों ने जिला प्रशासन और मंडला कलेक्टर से मांग की है कि महाकौशल विपणन संघ द्वारा वर्ष 2025 में की गई धान खरीदी की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर किसानों का रुका हुआ भुगतान तुरंत कराया जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी राशि उनके खातों में नहीं आई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।



 

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