ऐतिहासिक व्यास नारायण मंदिर में गूंज रहे शिव मंत्र
वर्ष 2019 से अनवरत जारी है सामूहिक रुद्राभिषेक
- संरक्षण की बाट जोह रही मंडला की पुरातात्विक धरोहर
- व्यास नारायण मंदिर के संवर्धन के लिए भक्तों से आगे आने की अपील
- माँ नर्मदा उत्तर वाहिनी परिक्रमा का है मुख्य केंद्र
मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य जिला माहिष्मती नगरी के नर्मदा तट पर स्थित मंडला की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर व्यास नारायण मंदिर में भक्ति और आस्था का संगम अनवरत देखने को मिल रहा है। किले वार्ड राजराजेश्वरी क्षेत्र में स्थापित इस प्राचीन मंदिर में वर्ष 2019 से प्रत्येक सोमवार को सामूहिक रुद्राभिषेक, आरती और प्रसादी वितरण का आयोजन श्रद्धापूर्वक किया जा रहा है।
जानकारी अनुसार व्यास नारायण मंदिर का धार्मिक महत्व अत्यंत विशिष्ट है। मान्यताओं के अनुसार माँ नर्मदा की उत्तर वाहिनी परिक्रमा का संकल्प इसी मंदिर से प्रारंभ होता है और परिक्रमा की पूर्णता के बाद मां नर्मदा को जल अर्पण के साथ इसका समापन भी यहीं होता है। महाशिवरात्रि जैसे पावन पर्वों पर यहाँ भक्तों का भारी सैलाब उमड़ता है। मंदिर का उल्लेख हिंदू धर्म के प्राचीन वेद-पुराणों में भी मिलता है, जो इसकी पौराणिक महत्ता को दर्शाता है।
अनवरत सेवा के साथ भक्ति का संकल्प
मंदिर में चल रही इस भक्ति यात्रा को क्षेत्र के दीपक सोनी, महेंद्र बर्वे, पंडित कमलेंद्र ज्योतिषी, पंडित त्रिभुवन नाथ और स्थानीय मातृशक्ति के विशेष सहयोग से निरंतरता मिल रही है। बीते कई वर्षों से यह टोली मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से सनातन संस्कृति के संरक्षण का कार्य कर रही है, जो आज दिनांक तक निरंतर जारी है। व्यास नारायण मंदिर में स्थापित भोलेनाथ का प्रत्येक सोमवार को अभिषेक कर विशेष श्रृंगार किया जाता है।
संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता
बताया गया कि व्यास नारायण मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से इतना महत्वपूर्ण होने के बावजूद, वर्तमान में इस पुरातात्विक धरोहर को विशेष संरक्षण और संवर्धन की दरकार है। मंदिर समिति और प्रबुद्धजनों ने मंडला जिले के समस्त भक्तों और नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इस ऐतिहासिक स्थल के अस्तित्व को बचाने और इसके विकास में अपना मार्गदर्शन व सहयोग प्रदान करें। मंदिर के कायाकल्प से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि हमारी प्राचीन विरासत भी सुरक्षित रह सकेगी।











