घुघरी में हादसों का ब्लैक संडे, 24 घंटे में चार मौतें

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घुघरी में हादसों का ब्लैक संडे, 24 घंटे में चार मौतें

सड़क हादसा और आत्महत्या ने छीनी चार जिंदगियां

  • अस्पताल में अव्यवस्थाओं ने बढ़ाया दर्द
  • तेज रफ्तार का कहर, पेड़ से टकराई बाइक, दो दोस्तों की मौत
  • स्वीपर न होने से पोस्टमार्टम के लिए घंटों भटके परिजन

मंडला महावीर न्यूज 29. जनपद के घुघरी ब्लॉक में पिछले 24 घंटे काल बनकर टूटे। यहाँ अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की असामयिक मृत्यु हो गई, जिससे समूचे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। एक ओर जहाँ सड़क हादसे ने दो परिवार को उजाड़ दिया, वहीं पुत्र वियोग में एक पिता ने भी दम तोड़ दिया।जानकारी अनुसार बीती रात मंडला-घुघरी मार्ग पर कटंगी ग्राम के समीप एक भीषण हादसा हुआ। तेज रफ्तार मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगे पेड़ से जा टकराई। भिड़ंत इतनी जोरदार थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए। बताया गया कि निखिल 18 वर्ष, निवासी अमझर और दिलीप पट्टा 18 वर्ष, निवासी गजराज की मौके पर ही मौत हो गई। इसके साथ ही महेंद्र पंद्रों 20 वर्ष को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल मंडला रेफर किया गया है, जहाँ उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।बताया गया कि दूसरी घटना में पाटन बंसीटोला के पास एक अज्ञात वाहन ने पैदल जा रहे 38 वर्षीय संबल सिंह मरकाम को पीछे से कुचल दिया। हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया। हादसे में संबल सिंह की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस ने सभी प्रकरणों में मर्ग कायम कर लिया है और अज्ञात वाहन की तलाश सहित अन्य मामलों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। एक ही दिन में चार पोस्टमार्टम होने से स्वास्थ्य केंद्र और पूरे क्षेत्र में सन्नाटा पसरा रहा।

बेटे की मौत का सदमा नहीं सह सका पिता 

घोरेघाट ग्राम में मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। 40 वर्षीय प्रेम सिंह ने अपने बेटे की विगत दिवस सड़क हादसे में हुई मौत के गम में कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने बताया कि वे लंबे समय से मानसिक तनाव और अवसाद में थे। जिसके कारण उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया और अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

अस्पताल की बदहाली से परेशान 

जब इन मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए घुघरी स्वास्थ्य केंद्र लाए गए, तो वहां की बदतर स्वास्थ्य व्यवस्था उजागर हो गई। स्वास्थ्य केंद्र में स्थाई स्वीपर न होने के कारण शव घंटों तक रखे रहे और स्वीपर का इंतजार करते रहे। अंतत: पीडि़त परिजनों को स्वयं के खर्च पर स्वीपर को बुलाकर पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं पूरी करानी पड़ीं।

इनका कहना है

यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि शोक संतप्त परिवारों को अस्पताल में भी भटकना पड़ रहा है। प्रशासन को तुरंत यहाँ स्थाई स्वीपर की नियुक्ति करनी चाहिए।
नीरज मरकाम, प्रदेश उपाध्यक्ष (भाजपा)



 

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