श्रद्धा की अनूठी मिसाल
महाराष्ट्र से 700 किमी पैदल चलकर मंडला पहुंचे दगड़ू बिहारी महाराज
- 50 एकड़ खेती और परिवार छोड़ भक्ति पथ पर निकले अहिल्यानगर के महाराज
- बेजुबान साथी के साथ माँ नर्मदा की पैदल परिक्रमा में निकले दगड़ू बिहारी महाराज
मंडला महावीर न्यूज 29. आस्था और अटूट श्रद्धा की राह पर निकले महाराष्ट्र के अहिल्यानगर पुणे निवासी दगड़ू बिहारी महाराज इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं। गोरखनाथ परंपरा के अनुयायी महाराज जी ने माँ नर्मदा की पूर्ण पैदल परिक्रमा का संकल्प लिया है। विशेष बात यह है कि वे अकेले नहीं, बल्कि अपने घोड़े के साथ इस कठिन यात्रा को पैदल ही पूरा कर रहे हैं।
जानकारी अनुसार दगड़ू बिहारी महाराज अपने घोड़े के साथ महाराष्ट्र के अहिल्यानगर से लगभग 700 किलोमीटर की लंबी दूरी पैदल तय कर ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर पहुंचे। वहाँ विधि-विधान से पूजन के बाद उन्होंने माँ नर्मदा की पूर्ण परिक्रमा प्रारंभ की। यात्रा के दौरान वे निरंतर अपने बेजुबान साथी (घोड़े) को भी पैदल ही परिक्रमा करवा रहे हैं, जो उनकी पशु प्रेम और भक्ति का अद्भुत समन्वय दर्शाता है।
महाराजपुर में हुआ आत्मीय स्वागत
परिक्रमा पथ पर चलते हुए महाराज जी बीते शाम मंडला के महाराजपुर स्थित सुहानंद रेवा सेवा आश्रम पहुंचे। आश्रम प्रबंधक मुकेश सोनी ने उनका पुष्पहारों से हार्दिक स्वागत किया। इस दौरान आश्रम द्वारा मानवता का परिचय देते हुए न केवल महाराज जी के विश्राम की व्यवस्था की गई, बल्कि उनके घोड़े के लिए ताजी घास और पानी का विशेष प्रबंध भी किया गया।
सेवा के लिए समर्पित करेंगे जीवन
गोरखनाथ परंपरा को मानने वाले दगड़ू बिहारी महाराज का महाराष्ट्र में भरा-पूरा परिवार है और अहिल्यानगर पुणे में उनकी लगभग 50 एकड़ कृषि भूमि है। उन्होंने बताया कि इस परिक्रमा के बाद वे अपना शेष जीवन समाज सेवा को समर्पित करना चाहते हैं। उनका संकल्प है कि वे अपनी भूमि पर एक भव्य आश्रम का निर्माण करवाएंगे, जहाँ असहायों और सेवाभावी लोगों को आश्रय मिल सके। रात्रि विश्राम के बाद सुबह 6 बजे वे अपनी अगली मंजिल की ओर प्रस्थान पर निकल गए। बताया गया कि नर्मदा तट के ग्रामीण अंचलों में जहाँ भी महाराज जी गुजर रहे हैं, लोग इस अनूठी जोड़ी और उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति को देखकर नतमस्तक हो रहे हैं।










