रेलवे स्टेशन पर बना जन औषधि केंद्र बंद

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रेलवे स्टेशन पर बना जन औषधि केंद्र बंद

सस्ती दवाओं के लिए तरस रहे लोग

  • शोभा की सुपारी बना प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र
  • रेलवे और स्थानीय भाजपा नेतृत्व की उदासीनता उजागर

मंडला महावीर न्यूज 29. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं जब प्रशासनिक उदासीनता और स्थानीय नेतृत्व की अनदेखी का शिकार होती हैं, तो खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। कुछ ऐसा ही हाल दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, नागपुर डिवीजन के अंतर्गत आने वाले नैनपुर रेलवे स्टेशन पर बने प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का है। करोड़ों की सदस्यता का दावा करने वाली भाजपा और रेलवे प्रशासन की नाक के नीचे यह केंद्र आज केवल ‘शोभा की सुपारी’ बनकर रह गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को बाजार से बेहद कम दामों पर गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराना था। नैनपुर में यह केंद्र बनकर तैयार हुआ और कुछ समय तक इसका संचालन भी किया गया। लेकिन विडंबना यह है कि पिछले कई महीनों से इस केंद्र पर ताला लटका हुआ है।

कार्यकर्ताओं की कमी या इच्छाशक्ति का अभाव 

एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी मिस कॉल के जरिए देश भर में लाखों-करोड़ों सदस्य बनाने का अभियान चला रही है, वहीं नैनपुर में एक भी ऐसा समर्पित कार्यकर्ता या संचालक नहीं मिल पा रहा है, जो प्रधानमंत्री की इस जनहितैषी योजना को सुचारू रूप से चला सके।

रेलवे और स्थानीय प्रशासन मौन 

महीनों से बंद पड़े इस केंद्र को लेकर न तो रेलवे प्रबंधन ने कोई सुध ली है और न ही स्थानीय भाजपा नेताओं ने इसे पुनः शुरू करवाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाए हैं। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की इस उदासीनता के कारण क्षेत्र के लोगों को सस्ती दवाइयों का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे जनता में गहरा रोष व्याप्त है।

वर्तमान स्थिति को देखकर सवाल उठता है कि क्या केवल बुनियादी ढांचा खड़ा कर देना ही काफी है? जब तक इसका लाभ जनता को नहीं मिलेगा, तब तक ऐसी महत्वाकांक्षी योजनाएं सिर्फ कागजों और बंद कमरों तक ही सीमित रहेंगी।



 

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