मवई-कुडैला मार्ग निर्माण में अनियमितता पर कार्यपालन यंत्री, मंडला PWD में गिरी गाज
एसडीओ और उपयंत्री निलंबित
- तीन अधिकारी सस्पेंड कर सागर अटैच
- ब्लैकलिस्टेड कंपनी को ठेका देने का मामला गरमाया
मंडला महावीर न्यूज 29. लोक निर्माण विभाग में सड़क निर्माण कार्यों में लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं के विरुद्ध शासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। मवई-कुडैला मार्ग निर्माण में सामने आई गंभीर खामियों के चलते मंत्रालय स्तर से आदेश जारी कर तीन जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
बताया गया कि निलंबित होने वाले अधिकारियों में कार्यपालन यंत्री ज्ञान सिंह भलावी, बिछिया एसडीओ संजय द्विवेदी और उपयंत्री विकास मरकाम शामिल हैं। निलंबन अवधि के दौरान इन तीनों को सागर स्थित लोक निर्माण विभाग कार्यालय में अटैच किया गया है। शासन ने इनके स्थान पर नई नियुक्तियां भी कर दी हैं, जिसके तहत अर्पणा त्रिपाठी को मंडला का नया कार्यपालन यंत्री बनाया गया है, जबकि रीतू कौरव को बिछिया सब डिवीजन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
67 करोड़ की सड़क पर ब्लैकलिस्टेड कंपनी का खेल
यह पूरी कार्रवाई मवई-कुडैला मार्ग जिसकी लंबाई 35 किमी के निर्माण में हुई अनियमितताओं से जुड़ी है। करीब 67 करोड़ रुपये की लागत वाली इस सड़क का ठेका मेसर्स मैहर सीमेंट पाइप इंडस्ट्रीज जेवी, अरुण कंस्ट्रक्शन (रीवा) को दिया गया था। गौर करने वाली बात यह है कि इस कंपनी को पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर स्तर से पहले ही ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था, इसके बावजूद उसे करोड़ों का काम सौंप दिया गया।
पुरानी जांचों और भेदभाव पर उठ रहे सवाल
एक ओर जहाँ मवई मामले में सख्त कदम उठाए गए हैं, वहीं विभाग के अन्य भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई न होने से पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दिसंबर 2025 में सड़क पैचवर्क, निवास पुलिया सुधार और विधायकों के वीसी रूम निर्माण में अनियमितता के आरोप उपयंत्री विशाल उइके और एसडीओ दीपिका टेकाम पर लगे थे। कलेक्टर सोमेश मिश्रा द्वारा सात दिवसीय नोटिस और जांच के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस दोहरे मापदंड और विभाग के गोलमोल जवाबों से आम जनता में भारी नाराजगी है। लोगों का आरोप है कि रसूखदार अधिकारियों को बचाने के लिए कुछ फाइलों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।










