सड़क से संसद तक शिक्षकों के सम्मान की लड़ाई
टीईटी प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा “आकास”
- रिटायर्ड चीफ जस्टिस रविशंकर झा करेंगे मप्र के शिक्षकों की पैरवी
- सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर
मंडला महावीर न्यूज 29. मध्य प्रदेश के लगभग दो लाख शिक्षकों के भविष्य से जुड़े शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) प्रकरण ने अब नया मोड़ ले लिया है। शिक्षकों के हितों के लिए संघर्षरत संगठन मप्र ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन ने इस मामले की प्रभावी पैरवी के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। संगठन ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश रविशंकर झा को अपना अधिवक्ता नियुक्त किया है।
एसोसिएशन के प्रदेश प्रवक्ता संजीव सोनी ने बताया कि प्रांतीय अध्यक्ष डीके सिंगौर के नेतृत्व में 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में दो दिनों तक गहन मंथन और वरिष्ठ अधिवक्ताओं से परामर्श के बाद यह ऐतिहासिक निर्णय लिया। पूर्व न्यायाधीश रविशंकर झा, जो जबलपुर हाई कोर्ट में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं, अब सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों का पक्ष मजबूती से रखेंगे।
न्यायालयीन और विधायी स्तर पर प्रयास
जिला उपाध्यक्ष उमेश यादव ने बताया कि संगठन का प्राथमिक उद्देश्य न्यायालयीन स्तर पर ही इस गंभीर स्थिति का निराकरण कराना है। इसी कड़ी में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जा रही है। संगठन का तर्क है कि पूर्व में शिक्षकों का पक्ष उचित तरीके से सुना ही नहीं गया। न्यायालयीन लड़ाई के साथ एसोसिएशन विधायी स्तर पर भी सक्रिय है। इस संबंध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, मप्र के स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह सहित कई सांसदों और विधायकों से संपर्क साधा गया है, ताकि आवश्यकता पडऩे पर नियमों में संशोधन या अध्यादेश की दिशा में कदम उठाए जा सकें।
संघर्ष का आह्वान
जिलाध्यक्ष दिलीप मरावी ने जिले के समस्त प्रभावित शिक्षकों से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षकों के सम्मान और हक के लिए यह लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक जारी रहेगी। इस पहल से प्रदेश के लाखों प्रभावित शिक्षकों में न्याय की नई उम्मीद जगी है।










