मौत को मात देकर लौटा नन्हा फरिश्ता

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मंडला जिला अस्पताल का करिश्मा

176 घंटे वेंटिलेटर पर रहने के बाद नवजात को मिला नया जीवन

  • मौत को मात देकर लौटा नन्हा फरिश्ता
  • SNCU के डॉक्टरों ने रचा इतिहास
  • 18 दिन चले संघर्ष के बाद मिली जीत

मंडला महावीर न्यूज 29। मध्यप्रदेश के मंडला जिला अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। यहां के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के अथक प्रयासों से एक नवजात शिशु को 176 घंटे (करीब 7 दिन से अधिक) तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखने के बाद सफलतापूर्वक बचा लिया गया। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद अब इस ‘नन्हे योद्धा’ को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।

जानकारी अनुसार नैनपुर (वार्ड क्रमांक 14) निवासी रेशमा खान के पुत्र का जन्म 28 फरवरी 2026 को हुआ था। जन्म के समय शिशु का वजन 2.6 किलोग्राम था, लेकिन वह सामान्य बच्चों की तरह रो नहीं पाया और उसे सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई होने लगी। स्थिति गंभीर देखते हुए उसे तुरंत जिला अस्पताल के SNCU में भर्ती किया गया।

जिले के इतिहास में पहली बार ऐसी सफलता

डॉक्टरों ने स्थिति की नाजुकता को भांपते हुए शिशु को तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, मंडला जिले के चिकित्सा इतिहास में यह पहला मामला है जब किसी नवजात को इतने लंबे समय (176 घंटे) तक वेंटिलेटर पर रखकर सुरक्षित बचाया गया हो। 18 दिनों तक चली गहन चिकित्सा और डॉक्टरों की दिन-रात की निगरानी के बाद शिशु की हालत में चमत्कारी सुधार हुआ।

परिजनों ने जताया आभार

17 मार्च को पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद नन्हे बालक को उसकी माँ की गोद में सौंप दिया गया। इस भावुक पल में परिजनों ने सिविल सर्जन, SNCU प्रभारी, बाल रोग विशेषज्ञों और समस्त नर्सिंग टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया। यह सफलता मंडला जिला अस्पताल की बढ़ती चिकित्सा क्षमताओं और स्वास्थ्य कर्मियों के अटूट समर्पण का प्रमाण है।



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