चैत्र नवरात्रि विशेष
साल भर निरोग रहने के लिए अपनाएं नीम और काली मिर्च का ‘रामबाण’ प्रयोग
- मधु मास में बढ़ जाती है रक्त की मिठास
- आयुर्वेद के अनुसार मीठे का सेवन है वर्जित
मंडला महावीर न्यूज 29. भारतीय संस्कृति में चैत्र मास का विशेष महत्व है। इसे ‘मधु मास’ भी कहा जाता है। आयुर्वेद और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में मानव शरीर के रक्त में शर्करा (मिठास) की मात्रा स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। यही कारण है कि इस दौरान गन्ने और उससे बने मीठे पदार्थों का सेवन वर्जित माना गया है।
प्रशिक्षित वैद्य एवं विशेषज्ञ सुदेश नामदेव (भुआ बिछिया) ने बताया कि चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन से किया गया एक छोटा सा प्रयोग व्यक्ति को साल भर गंभीर बीमारियों और संक्रमण से बचा सकता है।
क्या है आरोग्य का यह प्रयोग?
नवरात्रि के नौ दिनों तक सुबह खाली पेट (निराहार) नीम की ताजी कोमल पत्तियां और काली मिर्च का सेवन करना चाहिए:
- प्रथम दिन: 9 नीम की पत्तियां और 3 दाने काली मिर्च।
- क्रम: अगले 9 दिनों तक प्रतिदिन नीम की एक-एक पत्ती बढ़ाते जाएं (दूसरे दिन 10, तीसरे दिन 11…)।
इस प्रयोग के चमत्कारिक लाभ
वैद्य सुदेश नामदेव बताते हैं कि इस पारंपरिक विधि को अपनाने से शरीर में निम्नलिखित सुधार होते हैं:
- रक्त शुद्धि: नीम और काली मिर्च का मिश्रण रक्त को प्राकृतिक रूप से शुद्ध करता है और बढ़ी हुई मिठास को सामान्य करता है।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता: यह शरीर की ‘जीवनी शक्ति’ (Immunity) को बढ़ाता है, जिससे बाहरी संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।
- ऑक्सीजन लेवल: इस प्रयोग से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा संतुलित बनी रहती है।
- वर्ष भर आरोग्यता: जो व्यक्ति चैत्र मास में इस नियम का पालन करता है, उसका शरीर वर्ष भर निरोगी और ऊर्जावान बना रहता है।
यह प्रयोग सभी गंभीर बीमारियों से बचने के लिए एक ‘रामबाण’ उपाय है। हालांकि, इसे अपनाने से पहले अपनी शारीरिक प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखना भी आवश्यक है।












