मासूम दयानंद को मिली नई जिंदगी

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मासूम दयानंद को मिली नई जिंदगी

एनआरसी (NRC) में 20 दिनों के उपचार से दूर हुआ गंभीर कुपोषण

  • स्वास्थ्य विभाग की बड़ी सफलता
  • 1.600 किलो के शिशु का वजन बढ़कर हुआ 2.200 किलोग्राम
  • खिल उठी मां की मुस्कान

मंडला महावीर न्यूज 29. जिला चिकित्सालय मंडला स्थित पोषण पुनर्वास केन्द्र (NRC) से एक सुखद और प्रेरणादायक मामला सामने आया है। गंभीर कुपोषण, निमोनिया और खून की कमी से जूझ रहे 4 माह के मासूम दयानंद मार्को को 20 दिनों की विशेष देखरेख और सटीक उपचार के बाद नई जिंदगी मिली है। स्वास्थ्य विभाग की इस मुस्तैदी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सही पोषण और समय पर इलाज से गंभीर स्थितियों को भी मात दी जा सकती है।

अति कुपोषण की श्रेणी में था शिशु

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.जे. मोहंती ने बताया कि ग्राम बिजोरा (घुघरी) निवासी दयानंद को 26 फरवरी को बेहद नाजुक हालत में अस्पताल लाया गया था। शिशु को सर्दी, खांसी, बुखार के साथ गंभीर निमोनिया था। जाँच में उसका वजन मात्र 1.600 किलोग्राम पाया गया, जो अति कुपोषण की श्रेणी में आता है। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल पी.आई.सी.यू. (PICU) में भर्ती कर रक्त भी चढ़ाया गया।

विशेषज्ञों की टीम ने दी विशेष केयर

हालत में सुधार होने पर उसे पोषण पुनर्वास केन्द्र में स्थानांतरित किया गया। एनआरसी प्रभारी व शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेश ठाकुर की निगरानी में निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार उपचार शुरू हुआ। फीडिंग डेमोंस्ट्रेटर रश्मि वर्मा और नर्सिंग स्टाफ ने माँ रमली मार्को को ‘कंगारू मदर केयर’ (KMC) और सही स्तनपान की बारीकियां सिखाईं। लगातार 20 दिनों की मेहनत का परिणाम यह रहा कि डिस्चार्ज के समय बच्चे का वजन बढ़कर 2.200 किलोग्राम हो गया और वह पूरी तरह स्वस्थ होकर स्तनपान करने लगा।

टीम भावना से मिली सफलता

सिविल सर्जन डॉ. विजय धुर्वे के मार्गदर्शन में शिशु को सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया। इस दौरान नर्सिंग स्टाफ इंदु जंघेला, रोशनी मेरावी, प्रियंका पटेल सहित पूरी टीम ने माँ को घर पर शिशु की देखभाल, संक्रमण से बचाव और नियमित टीकाकरण का परामर्श दिया। मासूम की माँ रमली मार्को ने अस्पताल प्रबंधन और शासन-प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यहाँ मिली ममतामयी देखभाल ने ही उनके कलेजे के टुकड़े को नया जीवन दिया है।



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