टीईटी का संकट: 1.60 लाख शिक्षकों की नौकरी पर तलवार

Advertisements

टीईटी का संकट: 1.60 लाख शिक्षकों की नौकरी पर तलवार

ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन खटखटाएगा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

  • रिटायरमेंट की दहलीज पर परीक्षा का दबाव
  • शिक्षकों ने सरकार से कहा— 2010 में क्यों नहीं दी सूचना? अब रिव्यू पिटीशन ही एकमात्र रास्ता

मंडला महावीर न्यूज 29. मध्य प्रदेश के करीब 1 लाख 60 हजार शिक्षकों के भविष्य पर मंडरा रहे शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के संकट को लेकर ‘ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन’ ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष डी.के. सिंगौर के नेतृत्व में एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय गोयल और स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह से मुलाकात कर शिक्षकों की पीड़ा साझा की।

सरकार की रिव्यू से ज्यादा एसोसिएशन की याचिका अहम

प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के दौरान प्रदेश अध्यक्ष डी.के. सिंगौर ने स्पष्ट किया कि यद्यपि सरकार पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर करने की तैयारी कर रही है, लेकिन शिक्षक संगठन की याचिका अधिक प्रभावी होगी। उन्होंने तर्क दिया कि विभाग की अपनी कमियों और 2010 से 2019 के बीच समय पर जानकारी न देने जैसे तथ्यों को सरकार शायद मजबूती से न रख पाए, लेकिन संगठन इन बिंदुओं को निडरता से सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखेगा।

अधिकारी और मंत्री का आश्वासन

सचिव डॉ. संजय गोयल ने बताया कि मंत्री जी के निर्देशानुसार विभाग रिव्यू पिटीशन की तैयारी कर रहा है और इसके लिए विधि विभाग से परामर्श लिया जा रहा है। वहीं, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने भी आश्वस्त किया कि सरकार शिक्षकों के हित में कदम उठाएगी। एसोसिएशन ने अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां रिव्यू के माध्यम से फिलहाल अनिवार्यता पर रोक लग गई है।

शिक्षकों की प्रमुख आपत्तियां और चिंताएं

उम्र का पड़ाव: शिक्षकों का कहना है कि 20-25 साल की सेवा के बाद, जब वे बच्चों के विवाह और वृद्ध माता-पिता की सेवा की उम्र में हैं, तब उन्हें पात्रता साबित करने के लिए परीक्षा देना मानसिक प्रताड़ना जैसा है।

अध्यापक संवर्ग का नुकसान: यदि शिक्षक परीक्षा पास नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। चूंकि इनकी सेवा की गणना 2018 से हो रही है, ऐसे में एनपीएस (NPS) के कारण इन्हें न के बराबर पेंशन और ग्रेच्युटी मिलेगी।

नियमों की अस्पष्टता: एसोसिएशन के अनुसार, आरटीई एक्ट 2009 के लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। एनसीटीई के 2011 के नियमों में भी पुराने शिक्षकों को सुरक्षा प्रदान की गई थी।

व्यापम परीक्षा पर संशय: चर्चा के दौरान यह भी निकलकर आया कि व्यापम या गुरुजी पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण शिक्षकों को भी दोबारा टीईटी देनी पड़ सकती है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

आगामी रणनीति

एसोसिएशन ने निर्णय लिया है कि वे मार्च के अंत तक सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिव्यू पिटीशन दायर करेंगे। इसके साथ ही प्रदेश भर के विधायकों और मंत्रियों से मिलकर इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के माध्यम से नियमों में संशोधन कराने का दबाव बनाया जाएगा। बैठक में प्रांतीय महासचिव सुरेश यादव, जिला अध्यक्ष दिलीप मरावी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।



 

Leave a Comment