सेवारत शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता के खिलाफ लामबंद हुआ TWTA

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सेवारत शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता के खिलाफ लामबंद हुआ TWTA

20-22 साल की सेवा के बाद परीक्षा देना अन्यायपूर्ण: शिक्षक संगठन

  • रिव्यू पिटिशन की तैयारी
  • प्रांतीय बैठक में बनी रणनीति

मंडला महावीर न्यूज 29.  सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गैर-शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण शिक्षकों को दो वर्ष के भीतर परीक्षा पास करने के दिए गए निर्देश ने शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है। इस निर्णय के विरोध में ‘ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन’ (TWTA) ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन की एक महत्वपूर्ण प्रांत स्तरीय ऑनलाइन बैठक प्रदेश अध्यक्ष डी.के. सिंगौर एवं महासचिव सुरेश यादव की अगुवाई में आयोजित हुई, जिसमें भविष्य की कार्ययोजना तैयार की गई।

सर्वोच्च न्यायालय की डबल बेंच ने हाल ही में निर्णय दिया है कि वे सभी शिक्षक, जिनकी सेवा पाँच वर्ष से अधिक शेष है और जो TET उत्तीर्ण नहीं हैं, उन्हें दो वर्ष के भीतर यह परीक्षा पास करनी होगी। ऐसा न करने पर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति (कंपलसरी रिटायरमेंट) दी जा सकती है।

‘न्यायसंगत नहीं है परीक्षा की बाध्यता’

बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि जिस समय उनकी भर्ती हुई थी, उस समय TET अनिवार्य नहीं था। ऐसे में 20–22 वर्ष की लंबी सेवा दे चुके अनुभवी शिक्षकों को अचानक परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह उनके साथ अन्याय भी है। प्रदेश अध्यक्ष डी.के. सिंगौर ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश के अध्यापक संवर्ग में कंपलसरी रिटायरमेंट की स्पष्ट व्यवस्था भी नहीं है।

रिव्यू पिटिशन और कानूनी आधार की तलाश

एसोसिएशन ने तय किया है कि वे इस निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में रिव्यू पिटिशन दायर करेंगे। संगठन का तर्क है कि उनके पास शिक्षकों को इस बाध्यता से बचाने के लिए पुख्ता आधार हैं। इसमें राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की 2011 की अधिसूचना और 2019 तक की समय-सीमा जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को आधार बनाया जा रहा है।

विधायकों और मंत्रियों से करेंगे मुलाकात

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि एसोसिएशन के पदाधिकारी प्रदेश भर के मंत्रियों और विधायकों से मुलाकात कर उन्हें इस गंभीर समस्या से अवगत कराएंगे। साथ ही राज्य सरकार से मांग की जाएगी कि वह केंद्र सरकार के माध्यम से नियमों में संशोधन की पहल करे और सर्वोच्च न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रखे।

शिक्षा व्यवस्था पर मंडराया संकट

शिक्षकों का मानना है कि ट्राइबल विभाग में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है और अतिथि शिक्षकों के भरोसे काम चल रहा है। यदि अनुभवी शिक्षकों को सेवा से पृथक किया गया, तो इससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था चरमरा जाएगी। बैठक में मुकेश पाटीदार, शिरीन कुरैशी, प्रीति सूर्येश, साजिर कादरी, अरुण कुशवाह, संजीव सोनी सहित प्रदेश भर से 100 से अधिक पदाधिकारी उपस्थित रहे।



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