आयुर्वेद का चमत्कार: ‘वच’ औषधि से बढ़ेगी बच्चों की बुद्धि और स्मरण शक्ति
बिछिया के वैद्य सुदेश नामदेव का आह्वान
- चंद्र ग्रहण के शुभ मुहूर्त में ‘वच’ का सेवन बनाएगा महाज्ञानी
- आधुनिक रिसर्च से पहले ऋषियों ने सिद्ध किया आयुर्वेद
- स्मरण शक्ति और बौद्धिक विकास के लिए ‘वच’ है रामबाण
मंडला महावीर न्यूज 29. भारतीय आयुर्वेद परंपरा में वनस्पतियों और रसायनों का महत्व केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक और बौद्धिक विकास का भी सशक्त माध्यम है। इसी क्रम में, मंडला जिले के भुआ बिछिया स्थित प्रशिक्षित वैद्य सुदेश नामदेव (स्त्री एवं पुरुष रोग विशेषज्ञ) ने प्राचीन संहिताओं के आधार पर ‘वच’ (Acorus Calamus) औषधि के अद्भुत गुणों और इसके प्रयोग की विधि साझा की है।
प्राचीन संहिताओं का प्रमाण और चंद्र ग्रहण का योग:
वैद्य सुदेश नामदेव ने चरक, सुश्रुत और वाग्भट्ट जैसे महान महर्षियों के शोध का हवाला देते हुए बताया कि ‘वच’ चूर्ण का सेवन मनुष्य को अत्यंत बुद्धिमान और प्रज्ञावान बनाता है। शास्त्रोक्त प्रमाणों के अनुसार विशेष रूप से चंद्र ग्रहण या सूर्य ग्रहण के समय दूध के साथ इसका सेवन चमत्कारी परिणाम देता है। आगामी 3 मार्च को शाम 6:20 से 6:46 बजे तक होने वाले चंद्र ग्रहण के समय को उन्होंने इस औषधि के निर्माण और सेवन के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त बताया है।
स्मरण शक्ति और रोगों में प्रभावी:
वच जिसे सामान्य भाषा में ‘घोडवच’ भी कहा जाता है, न केवल याददाश्त बढ़ाने में सहायक है, बल्कि यह उन्माद (Inanity), अपस्मार (Epilepsy), हिस्टिरिया, श्वास रोग, कंठ रोग और जीर्ण अतिसार जैसी बीमारियों में भी अत्यंत लाभकारी है। वैद्य जी का कहना है कि हमारे ऋषियों ने ये प्रयोग चूहों या बिल्लियों पर नहीं, बल्कि हजारों मनुष्यों पर सफल परीक्षण के बाद लिखे हैं। दुर्भाग्यवश, भारत का विद्वान वर्ग इसे पश्चिमी देशों तक नहीं पहुँचा पाया, जबकि भविष्य में यही शोध अमेरिका से लौटकर आने पर लोग इसे सहर्ष स्वीकार करेंगे।
सेवन विधि और सावधानियाँ:
औषधि की मात्रा का निर्धारण आयु के अनुसार अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैद्य जी के अनुसार:
- बच्चों के लिए: 50 से 100 मि.ग्रा.।
- युवाओं के लिए: 150 से 250 मि.ग्रा.।
- इसे जल या दूध के साथ एक माह तक नियमित सेवन किया जा सकता है।
विशेष चेतावनी:
आयुर्वेद विशेषज्ञ ने आगाह किया है कि ‘पित्त प्रकृति’ वाले व्यक्तियों को वच का सेवन नहीं करना चाहिए। अधिक मात्रा में सेवन करने से वमन (उल्टी) या जी घबराने जैसी समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में सौंफ का पानी या नींबू का शरबत पिलाना लाभकारी होता है। उन्होंने समस्त आयुर्वेद चिकित्सकों और जनमानस से अपील की है कि वे इस प्राचीन ज्ञान का लाभ उठाएं और नई पीढ़ी को बौद्धिक रूप से सशक्त बनाएं।
स्त्री एवं पुरुष रोग विशेषज्ञ प्रशिक्षित
वैद्य सुदेश नामदेव भुआ बिछिया जिला मंडला, Mo.- 7771926346












