6 जिंदगियां लीलने वाले दरिंदे को मिली फांसी की सजा

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मनेरी नरसंहार

6 जिंदगियां लीलने वाले दरिंदे को मिली फांसी की सजा

  • कोर्ट ने माना विरल से विरलतम मामला
  • न्याय की हुई जीत, 2 मासूमों सहित 6 की हत्या करने वाले हरीश को मृत्युदंड
  • फैसले के बाद तालियों से गूंज उठा परिसर

मंडला महावीर न्यूज 29. आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला के अंतर्गत आने वाले बीजाडांडी थाना क्षेत्र मनेरी में करीब साढ़े पांच साल पहले हुए रोंगटे खड़े कर देने वाले हत्याकांड में न्याय की बड़ी जीत हुई है। गुरुवार 26 फरवरी को निवास के अपर सत्र न्यायाधीश प्रवीण कुमार सिन्हा ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी हरी उर्फ हरीश सोनी को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने इस कू्ररतम कृत्य को रेयरेस्ट ऑफ रेयर (विरल से विरलतम) श्रेणी में रखते हुए दोषी को समाज में रहने के अयोग्य माना है।जानकारी अनुसार घटना 15 जुलाई 2020 की है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। मनेरी निवासी आरोपी हरीश सोनी को इस नरसंहार हत्या के लिए पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उसके भाई संतोष सोनी जो कि पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है उसने अपने ही सगे संबंधियों पर कुल्हाड़ी और तलवार से खूनी तांडव मचाया था। बताया गया कि विवाद की जड़ प्रधानमंत्री आवास का कैंसिल होना और पारिवारिक रंजिश थी। आरोपियों को शक था कि उनके भाई और उप-सरपंच विनोद सोनी व राजेंद्र सोनी ने उनका आवास निरस्त कराया है। इसी प्रतिशोध की आग में जलते हुए दोनों भाइयों ने नरसंहार को अंजाम दिया।

खूनी तांडव-6 लोगों की निर्मम हत्या 

बताया गया कि फरियादी संतोष उर्फ गुड्डा सोनी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आरोपियों ने सबसे पहले राजेंद्र (रज्जन) सोनी और उनकी बेटी रानू पर हमला किया। हमला इतना बर्बर था कि दोनों की गर्दन और सिर पर गहरे घाव थे और लाशों पर मिर्ची पाउडर छिड़का गया था। इसके बाद दरिंदों ने छोटे भाई विनोद सोनी जो उप-सरपंच थे उनकी हत्या की। इसके साथ बाद मासूम बच्चें जिसमें ओम सोनी 8 वर्ष और श्रीयांश सोनी 6 वर्ष को भी नहीं बख्शा और उन्हें मौत के घाट उतार दिया। इसके साथ ही राजेंद्र सोनी के समधी दिनेश सोनी की भी हत्या कर दी। बताया गया कि बीच-बचाव करने आए नितिन सोनी, प्रमोद सोनी, रिंकी सोनी, सानू तिवारी और सुनील तिवारी को गंभीर रूप से घायल कर दिया था।

पुलिस पर किया हमला, एक आरोपी की एनकाउंटर में मौत 

घटना के वक्त आरोपी हाथ में नंगी तलवार और कुल्हाड़ी लेकर गांव में खुलेआम घूम रहे थे। सूचना मिलते ही बीजाडांडी, निवास और टिकरिया थाने का बल मौके पर पहुंचा। जब पुलिस ने इन्हें पकडऩे की कोशिश की, तो आरोपियों ने पुलिस टीम पर भी हमला कर दिया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोलियां चलाईं, जिसमें एक आरोपी संतोष सोनी मौके पर ही मारा गया, जबकि हरीश सोनी के पैर में गोली लगी और उसे काबू में किया गया।

न्यायालय का सख्त फैसला 

न्यायाधीश प्रवीण कुमार सिन्हा ने अभियोजन पक्ष के तर्कों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी हरीश सोनी को विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई। प्रत्येक हत्या के लिए मृत्युदंड और और तीन हजार रुपये अर्थदंड। पांच हत्या के प्रयास में 5 बार आजीवन कारावास और 2500 रुपये अर्थदंड। इसके साथ ही 10 वर्ष सश्रम कारावास और 500 रुपये अर्थदंड। आम्र्स एक्ट के तहत 2 वर्ष कारावास और 1000 रुपये अर्थदंड। कुल मिलाकर आरोपी पर 7000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

अदालत में गमगीन माहौल और गूूंज उठी तालियां 

जैसे ही यह खबर फैली कि आज फैसले का दिन है, न्यायालय परिसर छावनी में तब्दील हो गया। बड़ी संख्या में मृतकों के परिजन और ग्रामीण कोर्ट पहुंचे। आरोपी को देखते ही परिजन रोने-बिलखने लगे और बार-बार पूछते रहे कि आखिर उन मासूम बच्चों का क्या कसूर था। जैसे ही न्यायाधीश ने सजा-ए-मौत का ऐलान किया, पूरा न्यायालय परिसर तालियों की गडग़ड़ाहट से गूँज उठा। लोगों ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त किया।

अब मिलेगी आत्मा को शांति 

मृतक परिवार के सदस्यों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे इस फैसले से पूरी तरह संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि साढ़े पांच साल से हम न्याय का इंतजार कर रहे थे। आज हमारे अपनों और उन दो मासूम बच्चों की आत्मा को शांति मिलेगी। हालांकि उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की कि सजा के क्रियान्वयन में देरी न की जाए और दरिंदे को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाया जाए।

पुलिस प्रशासन रहा सतर्कता 

फैसले के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। जिला पुलिस लाइन की विशेष गार्ड और निवास थाना प्रभारी गोपाल घासले के नेतृत्व में पुलिस बल मुस्तैद रहा। अभियोजन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी उज्ज्वला उईके ने मामले की पैरवी की। इस सनसनीखेज मामले को सुलझाने और सजा दिलाने में तत्कालीन थाना प्रभारी सुदर्शन टोप्पो, एसएस उसराठे, उप निरीक्षक पंकज विश्वकर्मा, शशांक शुक्ला और आरक्षक रोशनलाल सिंगरौरे की महत्वपूर्ण भूमिका रही।



रिपोर्टर- रोहित प्रशांत चौकसे


 

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