लोकायुक्त का बड़ा धमाका
निवास एसडीएम कार्यालय का बाबू रंगे हाथों गिरफ्तार
- खसरा रिकॉर्ड में नाम सुधारने के बदले मांग रहा था रिश्वत
- लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने बिछाया जाल
मंडला महावीर न्यूज 29. जिले के निवास क्षेत्र में बुधवार को लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। जबलपुर लोकायुक्त की आठ सदस्यीय टीम ने निवास एसडीएम कार्यालय में पदस्थ ग्रेड-3 लिपिक काशीराम मरावी को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। यह कार्रवाई एक किसान की शिकायत पर बुधवार दोपहर करीब 1 बजे कार्यालय परिसर में ही की गई।
शिकायतकर्ता किसान गेंद लाल ने बताया कि उनकी पुश्तैनी जमीन के खसरा रिकॉर्ड में एक लिपिकीय त्रुटि हो गई थी। रिकॉर्ड में उनके पिता का नाम मूलचंद के स्थान पर गलती से फूलचंद दर्ज हो गया था। इस त्रुटि को सुधरवाने के लिए उन्होंने एसडीएम कार्यालय में आवेदन दिया था। आरोप है कि इस काम को करने के बदले लिपिक काशीराम मरावी ने 10 हजार रुपये की मांग की थी, जो बाद में 8 हजार रुपये में तय हुई।
लोकायुक्त ने ऐसे बिछाया जाल
परेशान किसान ने रिश्वत देने के बजाय जबलपुर लोकायुक्त कार्यालय में इसकी शिकायत दर्ज करा दी। शिकायत की पुष्टि होने के बाद योजना के अनुसार बुधवार को रिश्वत की पहली किश्त के रूप में पांच हजार रुपये देना तय हुआ। जैसे ही लिपिक ने किसान से रंगे हुए नोट स्वीकार किए और पहले से घात लगाकर बैठी लोकायुक्त टीम ने उन्हें दबोच लिया। टीम ने तत्काल उनके हाथ धुलवाए, जो रसायनों के कारण गुलाबी हो गए, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हो गई।
रंगे हाथ पकड़ा गया बाबू
लोकायुक्त निरीक्षक जितेंद्र यादव ने बताया कि आवेदक की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है। एसडीएम कार्यालय में पदस्थ लिपिक काशीराम मरावी ने नाम सुधार के लिए रिश्वत की मांग की थी। आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा गया है और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। इस कार्रवाई के बाद निवास तहसील और एसडीएम कार्यालय में हड़कंप मच गया है। लोकायुक्त की इस सक्रियता ने भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है। कार्रवाई के दौरान ट्रेप दल में टीएलओ निरीक्षक शशिकला मस्कुले, निरीक्षक जितेन्द्र यादव, उपनिरीक्षक शिशिर पांडेय समेत लोकायुक्त जबलपुर का दल शामिल रहा।











