आयुष्मान मित्रों की नियुक्ति पर बाबू भारी
भोपाल और सीएमएचओ के आदेश को ठेंगा दिखा रहे जिम्मेदार
- कमीशन के खेल में आउटसोर्स कंपनी को बढ़ावा
- डेढ़ माह से आयुष्मान का कार्य ठप
- आयुष्मान मित्र आर्थिक तंगी के शिकार
मंडला महावीर न्यूज 29. शासन की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत निरामयम योजना मंडला जिले में प्रशासनिक खींचतान और कमीशनखोरी की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। प्रदेश स्तर पर निजी एजेंसी का अनुबंध समाप्त होने के बाद राज्य स्वास्थ्य एजेंसी और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि योजना को निर्बाध रूप से चलाने के लिए रोगी कल्याण समिति के माध्यम से वैकल्पिक मानव संसाधन नियुक्त किए जाएं । इसके बावजूद, मंडला के जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में इन आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
जानकारी अनुसार सीएमएचओ मंडला द्वारा जारी संशोधित आदेश के अनुसार पूर्व में कार्यरत एजेंसी एमडी इंडिया टीएपी प्राईवेट लिमिटेड का अनुबंध 22 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुका है । योजना की निरंतरता बनाए रखने के लिए आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि आयुष्मान कार्ड निर्माण और क्लेम रजिस्ट्रेशन के लिए मौजूदा संसाधनों का उपयोग किया जाए। इसके साथ ही आवश्यकता पडऩे पर रोगी कल्याण समिति निधि का उपयोग करते हुए नियमानुसार मानव संसाधन नियुक्त किए जा सकते हैं। नवीन एजेंसी के चयन तक यह वैकल्पिक व्यवस्था जिला और खंड स्तर पर लागू रहनी चाहिए।
कमीशन के चक्कर में आदेश की अनदेखी
जिला अस्पताल के आयुष्मान मित्रों का आरोप है कि वहां कार्यरत एनएचएम के बाबू रजनीश तिवारी द्वारा सीएमएचओ और भोपाल के निर्देशों के विपरीत उन्हें आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से काम करने का दबाव बना रहे हैं। इस विवाद का मुख्य कारण कमीशन बताया जा रहा है। आयुष्मान मित्रों का कहना है कि यदि वे रोगी कल्याण समिति के माध्यम से सीधे नियुक्त होते हैं, तो उन्हें कुशल श्रेणी के तहत लगभग 15 हजार रुपये वेतन मिलेगा। इसके विपरीत प्राइवेट आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से उन्हें मात्र 5 से 6 हजार रुपये में काम करने को मजबूर किया जा रहा है। इस खींचतान के कारण पिछले डेढ़ माह से आयुष्मान मित्रों का काम बंद है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
अस्पतालों में न कार्ड बन रहे, न मिल रहा इंसेंटिव
अस्पतालों में आयुष्मान मित्रों की नियुक्ति न होने से दोहरा नुकसान हो रहा है। एक तरफ भर्ती होने वाले पात्र मरीजों के आयुष्मान कार्ड नहीं बन पा रहे हैं, जिससे उन्हें मुफ्त उपचार का लाभ लेने में कठिनाई हो रही है। दूसरी तरफ क्लेम रजिस्ट्रेशन का कार्य प्रभावित होने से डॉक्टरों और स्टाफ को मिलने वाला लाखों रुपये का इंसेंटिव भी अटक गया है। इसके साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर्स का कहना है कि रोगी कल्याण समिति के पास फंड की कमी है। हकीकत यह है कि जिले के कई सीएचसी में पिछले पांच वर्षों से आयुष्मान इंसेंटिव की लाखों रुपये की राशि भुगतान के लिए लंबित पड़ी है। जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह राशि न तो आरकेएस के खाते में आ पा रही है और न ही कर्मचारियों को मिल रही है।
प्रशासनिक दखल के बाद भी समाधान नहीं
मामले की गंभीरता को देखते हुए आयुष्मान मित्रों ने सिविल सर्जन डॉ. विजय धुर्वे से भी गुहार लगाई। सीएस ने जब संबंधित बाबू से समाधान के लिए पूछा, तो वहां भी आउटसोर्स कंपनी से ही रखने की बात दोहराई गई, जिसे आयुष्मान मित्रों ने सिरे से नकार दिया। वर्तमान स्थिति यह है कि प्रदेश स्तर पर नई एजेंसी का टेंडर अभी फाइनल नहीं हुआ है, और स्थानीय स्तर पर आरकेएस से नियुक्ति न होने के कारण योजना पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है।











