मौत के मुहाने से लौट आई जच्चा-बच्चा
मंडला से जबलपुर तक चला लाइफ सेविंग अभियान, डॉक्टरों की सूझबूझ ने बचाई जान
- अस्पताल के गार्ड ने दिया खून
- डॉक्टरों ने लड़ी जंग
- सुरक्षित है देल्हा की स्वाति और उसका नवजात
मंडला महावीर न्यूज 29. जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता से एक बार फिर मातृ-शिशु मृत्यु दर को रोकने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। तहसील नैनपुर के ग्राम देल्हा निवासी स्वाति भांवरे 20 वर्ष और उनके नवजात शिशु को गंभीर स्थिति के बावजूद चिकित्सकों के साझा प्रयासों से सुरक्षित बचा लिया गया है।
जानकारी अनुसार पहली बार गर्भवती हुई स्वाति को 18 फरवरी की शाम नैनपुर सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया था। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी स्थिति नाजुक थी। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें तुरंत जिला अस्पताल मंडला रेफर किया गया। मंडला मेटरनिटी विंग में जांच के दौरान डॉ. मालती उइके ने पाया कि प्लेसेंटा प्रीविया बच्चेदानी में बच्चे से पहले कनेरी निकलना के कारण स्थिति जानलेवा हो चुकी थी। शरीर में खून की भारी कमी थी और ब्लड बैंक में संबंधित गु्रप बी पॉजीटिव का रक्त उपलब्ध नहीं था। ऐसे में जिला अस्पताल के सुरक्षा गार्ड श्याम बिहारी ने स्वयं रक्तदान कर मानवता की अनूठी मिसाल पेश की। इसके साथ ही सिविल सर्जन डॉ. विजय धुर्वे ने रोगी कल्याण समिति के माध्यम से 2000 रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता भी प्रदान की।
जबलपुर में हुआ जटिल ऑपरेशन
स्थिति को देखते हुए मरीज को 108 एम्बुलेंस से मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर किया गया। ऑपरेशन के दौरान रक्तचाप गिरकर 20 तक पहुँच गया था, जो अत्यंत चिंताजनक था। मेडिकल कॉलेज की टीम ने जीवन रक्षक दवाओं और रक्त के माध्यम से स्थिति को संभाला और एक जटिल सिजेरियन ऑपरेशन के बाद माँ और बच्चे दोनों को सुरक्षित बचा लिया।
टीम वर्क ने जीता दिल
सीएमएचओ डॉ. डीजे मोहंती ने बताया कि नैनपुर से लेकर मंडला और फिर जबलपुर तक के चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के त्वरित निर्णयों ने इस अनहोनी को टाल दिया। वर्तमान में जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।










