खम्हरिया में वन भूमि पर नया गांव बसाने की कोशिश
बैगा बहुल्य ग्रामीणों ने वन विभाग और एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
- दलदला के लोगों पर परंपरागत वन भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप
- निस्तार और पशु चारे का संकट देख ग्राम सभा ने की सख्त कार्रवाई की मांग
मंडला महावीर न्यूज 29. मंडला जिले के विकासखंड मोहगांव अंतर्गत ग्राम पंचायत उमरिया के बैगा बहुल्य ग्राम खम्हरिया के ग्रामीणों ने वन भूमि पर कथित अवैध कब्जे और नई बसाहट के प्रयास के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस संबंध में ग्रामीणों ने वन विभाग और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) घुघरी को एक ज्ञापन सौंपकर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वन ग्राम दलदला चुभावल के लोगों द्वारा उनकी प्राचीन परंपरागत वन भूमि पर जबरन कब्जा कर नया वन ग्राम बसाने का प्रयास किया जा रहा है, जो पूरी तरह से नियम विरुद्ध है। ग्रामीणों ने बताया कि खम्हरिया से लगी यह प्राचीन परंपरागत वन भूमि सीमा सर्वे कंपार्टमेंट नंबर 1104, रकबा लगभग 200 हेक्टेयर ग्राम पंचायत उमरिया की ग्राम सभा के अधीन आती है। जबकि दलदला के लोग, जो यहां से करीब 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, इस भूमि पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।
कानून के उल्लंघन का उठाया मुद्दा
दिए गए आवेदन में बताया गया है कि यह कृत्य वन अधिकार अधिनियम 2006 की धारा 2(सी) और 4(1) का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसके तहत जंगल व वन भूमि पर पहला अधिकार उसी ग्राम सभा का होता है जो उससे प्राचीन परंपरागत रूप से जुड़ी है और उस पर निर्भर है। इसके साथ ही यह भू-राजस्व संहिता और भारतीय वन संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत भी अवैध अतिक्रमण की श्रेणी में आता है।
निस्तार और पशु चारे का संकट गहराने की आशंका
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस वन भूमि पर बाहरी कब्जा हो गया, तो खम्हरिया, सुडग़ांव, डोंगरगांव और उमरिया के ग्रामीणों का रोजमर्रा का निस्तार, पशुओं के लिए चारागाह और वनोपज पूरी तरह से छिन जाएगी, जिससे बैगा बहुल्य मूल आदिवासियों का जीवन बेहद संकटमय हो जाएगा। इस गंभीर समस्या को देखते हुए बीते 15 अक्टूबर को ग्राम सभा उमरिया ने आपत्ति प्रस्ताव पारित कर इस अवैध कब्जे पर रोक लगाने की मांग की थी।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग
ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट होकर मोहगांव वन परिक्षेत्र अधिकारी कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके पर संयुक्त सर्वे कराकर अवैध बसाहट के प्रयास पर तत्काल रोक लगाई जाए, जिससे वन भूमि को अतिक्रमण से बचाया जा सके। ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो उनका पारंपरिक अस्तित्व और जीवनयापन प्रभावित होगा।









