भक्तों ने दी माँ दुर्गा को विदाई, धूमधाम से मनाया दशहरा पर्व
- दूसरे दिन भी जारी रहा प्रतिमाओ का विसर्जन
- चल समारोह देखने उमड़ा जन सैलाब, जगह-जगह हुए भंडारा
मंडला महावीर न्यूज 29. जिले में दशहरा पर्व हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया गया। चल समारोह देखने भीड़ उमड़ पड़ी। मुख्य मार्ग में मूर्ति देखने श्रृद्धालुओं का तांता लगा रहा। नगर भ्रमण के बाद शांतिपूर्ण तरीके से मूर्तियों का विसर्जन किया गया। सार्वजनिक दुर्गा समितियों के सदस्य गाजे बाजे के साथ मूर्ति विसर्जन के लिए मातारानी को लेकर गए। विसर्जन के पहले दिन शहर में करीब दो दर्जन से अधिक दुर्गा प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए चल समारोह में निकाला गया। आतिशबाजी एवं नाचते झूमते हुए मॉ दुर्गा को उत्साह के साथ बिदा किया। दशहरा पर्व के दौरान नगरपालिका, पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन के द्वारा तमाम इंतजाम किए गए थे। शहर में पुलिस व्यवस्था चुस्त दुरूस्त रही। घाटों में भी सुरक्षा इंतजाम, गोताखोर व विद्युत रोशनी पर्याप्त रही।
प्रशासन द्वारा नाव घाट एवं उपनगर महाराजपुर में संगम घाट में मूर्ति विसर्जन के लिए इंतजामात किए गए थे। यहां के अलावा फूलसागर में भी मूर्तियों का विसर्जन किया गया। पुलिस की चाक चौबंद व्यवस्था रही। समितियों के सदस्यों को सहयोग करते हुए विसर्जन कार्यक्रम संपन्न हुआ। जिसके बाद जिले के कई क्षेत्रों में बनाए गए छोटे- छोटे रावण का दहन किया गया।
देर रात्रि तक चलता रहा विसर्जन का क्रम
नगरपालिका के द्वारा चल समारोह में शामिल होने वाली प्रतिमाओं के लिए व्यवस्था की गई थी। ग्रामीण क्षेत्र सहित नगर की अनेक प्रतिमाएं चल समारोह में शामिल हुई। लगातार प्रतिमाएं समारोह में नहीं दिखी। दुर्गा पंडाल से समितियों ने अपनी सुविधा के हिसाब से मूर्तियों को विसर्जन के लिए निकाला। जिससे मूर्तियों के लिए भक्तों को इंतजार करना पड़ा। देर रात्रि तक मूर्ति विसर्जन का क्रम चलता रहा। अधिकांश मूर्तियां ग्रामीण क्षेत्रों से आकर चल समारोह में शामिल हुई। देर रात्रि तक मूर्तियों का विसर्जन हुआ। दिन में भी मूर्ति विसर्जन के लिए प्रतिमाएं आई।
अन्य घाटों में किया गया विसर्जन
नपा द्वारा बनाए गए विसर्जन कुण्ड के अलावा जिले के अन्य स्थानों में भी देर शाम से ही नगर में स्थापित दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन का क्रम प्रारंभ हो गया था। जहॉ देर रात्रि तक विसर्जन चलता रहा। वहीं दूसरे दिन की दोपहर बाद से देवी प्रतिमाएं विसर्जन के लिए आना प्रारंभ हो गई। देर रात्रि तक मूर्तियां विसर्जित होती रही।
नीलकंठ के दर्शन किए भक्तों ने
दशहरा के दिन नीलकंठ के दर्शन से पुण्य मिलता है। मनोकामना पूरी होती है। इसके दर्शन के लिए मंगलवार को लोग शहर से ग्रामीण क्षेत्र, जंगल की ओर रवाना हुए। कुछ को दर्शन हुए तो कुछ बिना दर्शन के ही लौट गए। भक्तों ने नीलकंठ के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया।









